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कानपुर में अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान, राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार, रजिस्ट्री दफ्तर में बंद कराया काम

Published: Fri, 11 Sep 2026 01:11 PM (IST)

कानपुर में बार और लायर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार की घोषणा की है। अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट और ...और पढ़ें

प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में शामिल अधिवक्ता। जागरण

प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में शामिल अधिवक्ता। जागरण

HighLights

  1. कानपुर में बार और लायर्स एसोसिएशन का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू।

  2. अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने से अदालतों में सन्नाटा।

  3. रजिस्ट्री दफ्तरों में काम बंद, वादकारी और आम लोग परेशान।

जागरण संवाददाता, कानपुर। बार और लायर्स एसोसिएशन ने शनिवार को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का एलान कर दिया है। दोनों संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में बार एसोसिएशन परिसर में दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन दूसरे दिन शुक्रवार को चल रहा है। इसमें सभी जिलों के अधिवक्ता संघटनों के प्रतिनिधियों से भी राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार करने की मांग रखी गई है।


हर बुधवार को पूरे प्रदेश में अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव रखा गया है। कार्य से विरत रहने के कारण अदालतों में सन्नाटा है। ज्यादातर वादकारी अपने मुकदमों में तारीख लेकर लौट रहे हैं। कुछ अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री दफ्तर में पहुंचकर नारेबाजी करते हुए काम बंद करा दिया है। इससे रजिस्ट्री कराने आए लोग वापस लौट रहे हैं। स्टांप वेंडर और फोटोकापी तक की दुकानें बंद हैं।

Kanpur Advocates Boycott

शुक्रवार सुबह सम्मेलन का उद्धाटन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी, महामंत्री बिनय मिश्रा, लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा व महामंत्री राजीव यादव ने किया।
बार एसोसिएशन महामंत्री ने सम्मेलन में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट, वरिष्ठ अधिवक्ताओं को पेंशन, वकीलों के मुकदमे गैर जनपद ट्रांसफर करने के फैसले और हड़ताल की अंडरटेकिंग न देने समेत अन्य मुद्दों पर आम सहमति से प्रस्ताव रखे गए है।

अधिवक्ताओं ने कहा कि वह अब अपना हक लेकर रहेंगे। इसके लिए जरूरत पर आंदोलन और कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। आंदोलन की शुरुआत कानपुर से ही होगी। गैर जिलों से आए अधिवक्ता संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि वह हर आंदोलन में साथ देंगे। कानपुर से शुरू हुआ आंदोलन प्रदेश भर में होगा।

Kanpur Advocates

वहीं अधिवक्ताओं की ओर से रजिस्ट्री का काम बंद कराने और न्यायालय में भी काम न होने से सन्नाटा रहा। बता दें कि औसतन हर रोज दो सौ रजिस्ट्री होती है। 10 से 12 हजार मुकदमों की सुनवाई होती है।

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