कानपुर में 'किराये' के बैंक खातों से ठगी का खेल, गरीबों-मजदूरों को बनाते थे निशाना, 6 गिरफ्तार
कानपुर पुलिस ने 'किराये' के बैंक खातों का उपयोग कर ठगी करने वाले छह लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गरीबों और मजदूरों को निशाना बनाकर उनके खातों क ...और पढ़ें

म्यूल खातों में लाखों रुपये मंगवाकर ठगी करने में गिरफ्तार आरोपित। जागरण
HighLights
कानपुर में 'किराये' के बैंक खातों से ठगी का भंडाफोड़।
गरीबों-मजदूरों को निशाना बनाकर खुलवाए 25 खाते।
साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होते थे ये 'म्यूल' खाते।
जागरण संवाददाता, कानपुर। पांच से सात हजार रुपये प्रति माह किराये का लालच देकर लोगों के बैंक खाते में ठगी की रकम मंगाने वाले छह आरोपितों को रविवार को बेकनगंज थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों ने सात बैंकों में 25 लोगों के खाते खुलवाकर उनसे पासबुक और एटीएम ले लिए थे। इसमें ठगी की रकम मंगाने के बाद आरोपित एटीएम से उसे निकाल लेते थे। रविवार को बैंक बंद होने के चलते पुलिस अब सोमवार को इन खातों की जांच कराएगी।
एडीसीपी सेंट्रल डा. अर्चना सिंह के अनुसार, बेकनगंज थाने की साइबर हेल्पडेस्क पर सूचना मिली थी कि कुछ लोग रुपयों का लालच देकर लोगों के म्यूल बैंक खाते खुलवाते और उनकी पासबुक, एटीएम और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर हासिल कर लेते हैं। इसके बाद इन म्यूल खातों का प्रयोग वह साइबर ठगी और संदिग्ध लेनदेन में करते हैं। इस पर टीम ने जमुनिया रोड के पास से कर्नलगंज निवासी जावेद को पकड़ा। उसके पास से दो पासबुक बरामद हुई।
उसकी निशानदेही पर गुजैनी मर्दनपुर निवासी उसके साथियों दीपक शर्मा, काकादेव हितकारी नगर निवासी प्रिंस गौतम, डबल पुलिया निवासी युवराज, चमनगंज निवासी मो.असद और बर्रा निवासी लक्ष्यदीप को गिरफ्तार किया गया। आरोपितों के पास से बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ महाराष्ट्रा और बंधन बैंक समेत सात अलग-अलग बैंकों की पांच पासबुक बरामद हुईं।
पकड़े गए आरोपित चमनगंज, बेकनगंज, इफ्तिखाराबाद, दादामियां चौराहा, अनवरगंज, टुकनियां बाजार जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में रहने वाले गरीब, दिहाड़ी मजदूर और प्राइवेट नौकरी करने वालों को निशाना बनाते थे। उन्हें हर माह पांच से सात हजार रुपये कमीशन का लालच देकर उनका खाता किराये पर ले लेते थे। बाद में उसमें ठगी के लाखों रुपये मंगवाकर उसे एटीएम के माध्यम से निकाल लेते थे।
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जावेद और दीपक तो सिर्फ मोहरा, कोई और है सरगना
एडीसीपी डा.अर्चना सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में जावेद और दीपक शर्मा के इस गिरोह के सरगना होने की बात सामने आई थी। हालांकि, प्रत्येक खाता खुलवाने के बदले जावेद को सात हजार रुपये का कमीशन मिलता था। इसका मतलब है कि जावेद और दीपक इस काले खेल के महज मोहरे भर हैं। सरगना कोई और है जो पूरे गिरोह को चला रहा है। बैंक खातों की जांच पड़ताल के बाद पुलिस उस तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
क्या होता है म्यूल खाता
म्यूल खाता एक ऐसा बैंक खाता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी या जालसाज अवैध तरीके से कमाए गए रुपयों को प्राप्त करने, एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने या निकालने के लिए करते हैं। यह खाता आमतौर पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर होता है, लेकिन इसका नियंत्रण और उपयोग अपराधी करते हैं। इसके बदले वह खाताधारक को हर माह एक निश्चित रकम का लालच देकर इसे किराए पर ले लेते हैं।
गिरफ्तार आरोपित जावेद और दीपक लोगों को लोन दिलाने का भी काम करते थे। इसी बहाने वह उनसे दस्तावेज हासिल कर लेते थे। दूसरे शनिवार और रविवार के चलते बैंक बंद होने की वजह से खातों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं हो सकी है। सोमवार को बैंक खुलने के बाद इन संदिग्ध खातों की जांच पड़ताल की जाएगी कि इसमें कहां से और कितनी रकम पहुंची। खाताधारकों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। अगर उनकी संलिप्तता मिलती है तो उन्हें आरोपित बनाया जाएगा।
-डा. अर्चना सिंह, एडीसीपी सेंट्रल