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कासगंज में गंगा का रौद्र रूप, सात में तीन ठोकरें टूटीं; किसान की फसल हुई चौपट

By Suman Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 27 Aug 2026 08:25 PM (IST)

कासगंज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर स्थिर है, लेकिन पटियाली तहसील के कई गांवों में बाढ़ का ...और पढ़ें

कासगंज में गंगा के उफान के चलते ग्रामीण नावों का सहारा ले रहे हैं।

कासगंज में गंगा के उफान के चलते ग्रामीण नावों का सहारा ले रहे हैं।

जागरण संवाददाता, कासगंज। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचकर फिलहाल स्थिर हो गया है, लेकिन पटियाली तहसील क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। आधा दर्जन गांवों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई घरों में पानी भर जाने के कारण खाना पकाने, पीने के पानी और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हो रही है।

ग्रामीण गृहस्थी का जरूरी सामान ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। वहीं बरोना गांव में गंगा की धारा का दबाव बढ़ने से सात ठोकरों में से तीन के धंस गईं। इससे कटान तेज हो गया है। गांवों में पानी भरा है। पशु चहरे चारे के लिए भटक रहे हैं।

गंगा इस समय खतरे के निशान पर है। सुबह पानी खतरे के निशान से पार था। पिछले कई दिनों से जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ था। अब पानी स्थिर होने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन जलस्तर नीचे नहीं आने के कारण तटवर्ती गांवों में खतरा बना हुआ है। मूझखेड़ा, नरपत नगला, राजेपुर कुर्रा और नगला खना समेत अन्य गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचा है

कई स्थानों पर घरों के आसपास पानी जमा होने से ग्रामीणों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है। जलस्तर के फिलहाल स्थिर रहने से राहत जरूर है, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब पानी के अगले रुख पर टिकी है। उनका कहना है कि जब तक गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आता, तब तक बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।

बरोना गांव में गंगा की तेज धारा का दबाव लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की सुरक्षा के लिए बनाई गई सात ठोकरों में से तीन धंस गई हैं। इससे कटान की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का दबाव दोबारा बढ़ा तो धारा आबादी और कृषि क्षेत्र की ओर रुख कर सकती है।

मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, बीमारी का डर

गांवों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका सता रही है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दवा का छिड़काव कराने और स्वास्थ्य टीम भेजने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष गंगा की बाढ़ और कटान से फसल व मकानों को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका है।




कछला पुल पर गंगा के जलस्तर के साथ ही संवेदनशील तटवर्ती क्षेत्रों और तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। बरोना में ठोकरों और गंगा के पानी के दबाव पर विशेष नजर रखी जा रही है। जहां आवश्यकता होगी, वहां तत्काल बचाव कार्य कराया जाएगा। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए भी सतर्क किया जा रहा है

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- जितेंद्र अग्रवाल, अधिशासी, अभियंता, सिचाई विभाग