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    कौशांबी में लग सकते हैं 50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, लघु सिंचाई विभाग ने जिला शासन को भेजा प्रस्ताव

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 04:45 PM (GMT+05:30)

    कौशांबी में भूजल स्तर बढ़ाने और बरसाती पानी के सदुपयोग के लिए लघु सिंचाई विभाग ने 50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इ ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    HighLights

    1. 50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रस्ताव शासन को भेजा।

    2. बरसाती पानी का सदुपयोग कर भूजल स्तर बढ़ाना लक्ष्य।

    3. प्रत्येक सिस्टम पर डेढ़ से ढाई लाख रुपये का खर्च।

    जागरण संवाददाता, कौशांबी। सरकारी, गैर सरकारी भवनों, स्कूलों-कालेजों, कालोनियों, प्रतिष्ठानों, होटलों, रेस्टोरेंटों में बरसाती जल के सदुपयोग के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सबसे बढ़िया तरीका है।इसके माध्यम से ऐसे भवनों व वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के छतों एवं परिसर में एकत्रित होने वाला पानी सीधे धरती की कोख में जाता है।

    इससे भूजल स्तर में वृद्धि होती है। लघु सिंचाई विभाग ने जिले में 50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा है। हालांकि, अभी शासन की हरी झंडी मिलने का इंतजार विभाग को है।

    प्रस्ताव शासन को भेजा प्रस्ताव

    लघु सिंचाई विभाग की तरफ से प्रत्येक वर्ष निर्धारित सीमा में उन सरकारी भवनों, स्कूलों व कालेजों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजता है, जहां पर यह नहीं लगे हैं। उसी क्रम में इस साल भी 50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

    विभागीय अधिकारियों के मुताबिक आकार के हिसाब से प्रत्येक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए करीब डेढ़ से ढाई लाख रुपये का खर्च आता है। शासन की हरी झंडी मिलने के बाद सरकारी भवनों, स्कूलों-कालेजों का चयन करके रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने का कार्य शुरू कराया जाएगा।

    कैसे करता है यह काम

    संग्रहण क्षेत्र: छत अथवा परिसर में एकत्रित बारिश के पानी को संग्रह करने के लिए बनाया गया स्टोरेज टैंक अथवा गड्ढा।

    पाइप लाइन: छत से पानी को स्टोरेज टैंक अथवा गड्ढे तक पहुंचाने वाली पीवीसी पाइप।

    फर्स्ट फ्लश: यह एक वाल्व अथवा उपकरण होता है जो बारिश के पानी के साथ आने वाली मिट्टी, कचरा आदि को रोकता है।

    फिल्टर: पानी को साफ करने के लिए इसमें जाली, रेत और कंक्रीट का प्रयोग किया जाता है, जिससे कचरा व पत्तियां बाहर हो जाएं।

    रिचार्ज पिट: साफ पानी को स्टोर करने के लिए टैंक अथवा अतिरिक्त पानी को भूमि के अंदर भेजने के लिए सोक पिट बनाए जाते हैं।

    इन कार्यों में भी उपयोग में आता है पानी

    टैंकों अथवा गड्ढों में एकत्रित किए जाने वाले बरसाती पानी का प्रयोग सिंचाई व घरेलू उपयोग के लिए भी किया जा सकता है।


    50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन की स्वीकृति मिलने पर काम शुरू कराया जाएगा। -सुरेंद्र कुमार जैन, अवर अभियंता लघु सिंचाई।

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