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    कुशीनगर में सरकारी भूमि पर बड़ा फर्जीवाड़ा, 78 एकड़ जमीन पर निजी नाम दर्ज, पीढ़ी दर पीढ़ी होती रही वरासत

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 12:43 AM (IST)

    हाटा तहसील में 78 एकड़ सरकारी भूमि फर्जीवाड़े से निजी नाम पर दर्ज की गई, जबकि 21 एकड़ पर कब्जा किया गया है। प्रशासन अब इस भूमि को खाली कराकर पर्यटन वि ...और पढ़ें

    हाटा में 78 एकड़ सरकारी भूमि जालसाजों ने कराया अपने नाम, नोटिस

    हाटा में 78 एकड़ सरकारी भूमि जालसाजों ने कराया अपने नाम, नोटिस

    HighLights

    1. हाटा में 78 एकड़ सरकारी भूमि फर्जीवाड़े से निजी नाम पर दर्ज।

    2. दशकों से वरासत के नाम पर पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण।

    3. प्रशासन अब भूमि खाली करा पर्यटन विकास की कर रहा योजना।

    जागरण संवाददाता, कुशीनगर। अभी दुदही में कुछ दिन पूर्व फर्जी आदेश, दस्तखत व मुहर से 60 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अपने नाम कराने की जांच का मामला ठंडा भी नहीं हुआ है कि हाटा तहसील में 78 एकड़ सरकारी भूमि अपने नाम कराने तो 21 एकड़ पर कब्जा करने का बड़ा मामले सामने आया है।

    आश्चर्यजनक बात यह है कि दशकों से वरासत के नाम पर पीढ़ी दर पीढ़ी नाम होती आ रही इस भूमि को लेकर कभी प्रशासन की नींद ही नहीं खुली और इस पर हल चलते रहे। कुछ पर मकान बन गए हैं। कुछ ने दूसरे के हाथों बेच भी दिया है। इसको लेकर नोटिस जारी कर खाली करने को कहा गया है।

    फर्जीवाड़ा करने वाले लगभग सभी लोगों की मौत हो चुकी है। अब प्रशासन इसको खाली करा पर्यटन विकास से जुड़े कार्य करने की योजना बना रहा है। शनिवार को डीएम महेंद्र सिंह तंवर व एसपी केशव कुमार ने भूमि का निरीक्षण भी किया।

    हाटा तहसील के ग्राम पट्टन स्थित गाटा संख्या-59 मि एवं गाटा संख्या-8 (कुल लगभग 78 एकड़) तथा ग्राम सोनबरसा स्थित गाटा संख्या-156 (लगभग 21 एकड़) भूमि वर्ष 1323 फसली बंदोबस्त के अभिलेखों में सरकारी थी। एक प्रकरण की जांच में यह तथ्य सामने आया कि, फर्जीवाडा़ के जरिये भूमि वर्तमान में भूमिधरी के रूप में प्रयोग की जा रही है।

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    ग्राम सोनबरसा का गाटा संख्या-156 वर्तमान में खाली है तथा अभिलेखों में धूस के नाम से दर्ज है, लेकिन एस पर भी कब्जा किया गया है। अब फर्जी इंद्राज निरस्त कराने तथा भूमि को पुनः धूस के रूप में दर्ज कराने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जा रही है।

    डीएम ने भूमि की वर्तमान स्थिति, ड्रोन सर्वे, सीमांकन, अभिलेखीय विवरण एवं उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि से जुड़े सभी राजस्व अभिलेखों का गहन परीक्षण कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूर्ण की जाए, ताकि शासन स्तर पर प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा सके।

    बताया कि पर्यटन परियोजनाओं से क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी तथा स्थानीय नागरिकों को रोजगार, आधारभूत सुविधाओं एवं अन्य विकासात्मक योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा।