विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कुशीनगर में एक वर्ष में दस थाने में पॉक्सो एक्ट के दर्ज 32 मुकदमे झूठे, कई निर्दोषों को जाना पड़ा जेल

Published: Tue, 17 Feb 2026 03:13 PM (IST)

कुशीनगर में एक वर्ष के भीतर दस थानों में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज 32 मुकदमे जांच में झूठे पाए ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. कुशीनगर में 32 पॉक्सो मुकदमे जांच में झूठे पाए गए।

  2. भूमि विवाद, रंजिश में बच्चों का सहारा लेकर आरोप।

  3. पुलिस ने झूठे मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई।

प्रद्युम्न कुमार शुक्ल, कुशीनगर। दो महीने जेल में रहे विनोद पर लगे बच्ची के उत्पीड़न का आरोप जांच में गलत पाया गया। इस मामले में जांच के बाद पडरौना कोतवाली पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भूमि विवाद के मामले में रंजिशन फंसाने के लिए बच्ची के स्वजन झूठा मुकदमा दर्ज कराए थे। जेल के दौरान विनोद व परिवार के लोगों ने तरह-तरह की यातनाएं झेलीं। उन दिनों को याद कर वे आज भी डर जाते हैं। विनोद ही नहीं उनकी तरह झूठे मुकदमों में बीते वर्ष यहां 32 लोगों को जेल जाना पड़ा था।

आंकड़े बता रहे कि बच्चों व महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाएं भी झूठ की बुनियाद पर लिखाई जाने लगीं हैं। लोग भूमि विवाद, बंटवारा, लेन-देन यहां तक कि कहासुनी के विवाद में भी बच्चों का सहारा लेकर उनके उत्पीड़न का आरोप लगा रहे।

कोतवाली पडरौना, जटहाबाजार, कुबेरस्थान, तुर्कपट्टी, कसया, कोतवाली हाटा, अहिरौली बाजार, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा व कप्तानगंज समेत दस थानों में बीते वर्ष 2025 में पाक्सो एक्ट के 32 मुकदमे झूठे लिखाए गए थे। जिसमें अंतिम रिपोर्ट लगाकर पुलिस ने मामले को बंद कर दिया। विवेचना के दौरान खुद पीड़ित ही बयान देने से बदल गए। जांच में पता चला कि दोनों परिवारों के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही। घटना के दिन भी मामूली कहासुनी हुई थी।

कहीं भूमि विवाद तो कहीं रंजिश में लाेगों ने गलत आरोप लगाकार एफआईआर दर्ज कराई थी। मेडिकल रिपोर्ट में भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी। इस तरह जांच में यह तथ्य सामने आया कि इन मामलों में रंजिशन फंसाने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इस आधार पर अगर जनपद के सभी 21 थानों की बात करें तो यह संख्या 70 से अधिक हो सकती है। पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं कि लोग बच्चों का सहारा लेकर झूठे मामले दर्ज करा रहे हैं।

यह भी पढ़ें- कुशीनगर कांग्रेस अध्यक्ष रविंद्र राधे हाउस अरेस्ट, विधानसभा घेराव से पहले कार्रवाई

क्या है पाक्सो एक्ट
यह अधिनियम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर वर्ष 2012 में पाक्सो एक्ट-2012 के नाम से बना था। इस कानून के जरिये नाबालिग बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नाेग्राफी जैसे यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्राविधान है।

पाक्सो एक्ट के तहत झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के विरुद्ध झूठी सूचना देने का केस किया जा सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस संबंधित न्यायालय को रिपोर्ट बनाकर भेजेगी। न्यायालय इसका संज्ञान लेकर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश देगा। -खान सफीउल्लाह, वरिष्ठ अधिवक्ता क्रिमिनल, दीवानी कचहरी,पडरौना

पाक्सो एक्ट की घटनाओं को रोकने के लिए थानेदारों को हर मीटिंग में निर्देशित किया जाता है। भूमि विवाद, कहासुनी के मामले या फिर रंजिश में भी लोग इस तरह की शिकायत दर्ज करा रहे हैं। जांच में सच्चाई सामने आने पर इन मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगा दी जाती है।

-

-केशव कुमार, एसपी

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।