नेपाल के उजड़े घरों की कहानी सुना रही ‘नारायणी’, तस्वीरों में देखें एक झलक
नारायणी नदी में नेपाल से बहकर आया घरेलू सामान कुशीनगर के किनारे जमा हो रहा है, जो 26 अगस्त की ...और पढ़ें
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भैंसहा घाट के सामने नारायणी में बहकर आई लकड़ियों को निकालते ग्रामीण। जागरण
HighLights
नारायणी नदी में नेपाल की बाढ़ का मलबा बहकर आया।
कुशीनगर के तटों पर बिखरी उजड़ी गृहस्थी की कहानी।
नेपाल बाढ़ में कुशीनगर के दो लोग लापता हुए।
अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। नारायणी नदी के किनारे इन दिनों सिर्फ पानी नहीं बह रहा, नेपाल में उजड़े घरों की कहानियां भी तैरती हुई पहुंच रही हैं। कहीं टूटा दरवाजा है, कहीं पलंग का पाया, कहीं लकड़ी का टुकड़ा तो कहीं घर में खाना पकाने वाला गैस सिलेंडर। किनारे पर बिखरे जूते-चप्पल और घरेलू सामान यह अहसास कराने के लिए काफी हैं कि पहाड़ों में आई बाढ़ ने सिर्फ मकान नहीं बहाए, बल्कि लोगों की पूरी गृहस्थी को अपने साथ बहा लिया।
कुशीनगर के खड्डा व तमकुही क्षेत्र में नारायणी के किनारे शुनिवार को ऐसा ही दृश्य दिखाई दिया। छितौनी के समीप नदी के तीन नंबर ठोकर के आसपास बड़ी मात्रा में घरेलू सामान जमा मिला। ग्रामीणों के अनुसार, तेज बहाव में बहकर आए सामान में फर्नीचर, लकड़ी, प्लास्टिक की वस्तुएं और गैस सिलेंडर तक शामिल हैं। कुछ सिलेंडरों में गैस भरी होने की बात भी सामने आई है।
नदी में मृत पशु भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन सामानों की असली कहानी उनकी कीमत में नहीं, उनसे जुड़ी जिंदगी में छिपी है। जिस सिलेंडर पर किसी घर में रोज रोटी पकती होगी, जिस पलंग पर किसी परिवार का बच्चा सोता होगा और जिस दरवाजे के भीतर किसी परिवार की रोजमर्रा की दुनिया सुरक्षित थी, वही चीजें अब लगभग 300 किलोमीटर दूर दूसरे देश की नदी के किनारे पड़ी हैं।

नदी किनारे रहने दियारा के लोगों के लिए भी यह दृश्य विचलित करने वाला है, जो खुद हर साल बाढ़ और नदी के बदलते मिजाज से जूझते आ रहे हैं। शिवपुर के शिवबदन प्रसाद, बसंतपुर के राजेश जायसवाल, मरचिहवां के गोविंद प्रसाद कहते हैं कि, हम बाढ़ और उसकी त्रासदी से लड़ना जानते हैं, लेकिन नेपाल से बहकर आई यह गृहस्थी बाढ़ से आगे की एक ऐसी तबाही दिखा रही है, जिसमें लोगों को सामान बचाने तक का मौका नहीं मिला होगा।
26 अगस्त को नेपाल के भोटेकोशी क्षेत्र में आई भयावह बाढ़ का प्रवाह त्रिशूली होते हुए नारायणी तक पहुंचा। कुशीनगर के तट पर बिखरा गृहस्थी का सामान महज मलबा नहीं है। यह उन अनगिनत परिवारों की मौन कहानी है, जिनका घर पानी के एक प्रचंड झटके में घर नहीं रहा। नदी आगे बढ़ जाएगी, सामान बहकर कहीं और चला जाएगा, लेकिन किनारे पर पड़े ये निशान लंबे समय तक यह सवाल छोड़ जाएंगे, जिस घर की पूरी दुनिया पानी में बह गई, वहां बचा क्या होगा।

नेपाल के रसुआ में कार्यरत कुशीनगर के दो और लोग लापता
नेपाल में 26 अगस्त को जलप्रलय के बाद से रसुआ में एक पावर प्लांट में कार्य करने वाले गायब पांच लोगों के बाद शनिवार को दो और लोगों के गायब होने की खबर ने माहौल को को और गमगीन कर दिया।

कप्तानगंज थाना के गांव अमडीहा निवासी 32 वर्षीय अरुण कुमार सिंह का संपर्क स्वजन से नही हो पा रहा है। अनहोनी की आशंका से चिंतित हैं। वह बीते चार वर्षों से रसुआ के त्रिशुली क्षेत्र में कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।

स्वजन के अनुसार 26 अगस्त की सुबह अंतिम बार उनसे बातचीत हुई थी। इसके बाद से उनका फोन बंद आ रहा है। स्वजन कंपनी के कर्मचारियों व परिचितों से जानकारी लेने का प्रयास किए, अबतक कोई सूचना नहीं मिल पाई है। वह एक माह पूर्व ही घर आये थे।
पत्नी सौम्या सिंह चिंतित हैं तो अनहोनी की आशंका में माता पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। बोदरवार के मुंडेरा निवासी रवींद्र सिंह भी लापता है, वह भी इसी कंपनी मेंं कार्यरत थे।
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