नेपाल त्रासदी: थम नहीं रहे बाढ़ से तबाही के निशान, कुशीनगर में बहकर आ रहे शव और सामान
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के निशान अब भी कुशीनगर तक पहुंच रहे हैं, जहां नारायणी नदी में शवों और मलबे के मिलने का सिलसिला जारी है।

नेपाल बाढ़ के बाद लहरों में बहकर आ रहे शव और सामान।
HighLights
नारायणी नदी में नेपाल बाढ़ के शव और मलबा।
कुशीनगर में शुक्रवार को तीन पुरुष शव बरामद।
प्रशासन ने नदी में उतरने से बचने की अपील की।
अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। नेपाल के रसुवा से निकली विनाशकारी बाढ़ की तबाही के निशान अब भी नारायणी की धाराओं पर लगातार बहते हुए बुद्ध की निर्वाण स्थली कुशीनगर तक पहुंच रहे हैं। नदी का पानी भले ही घटने लगा हो, लेकिन उसके साथ बहकर आने वाली त्रासदी की तस्वीरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
मलबे, लकड़ियों और उजड़े घरों के सामान के बीच शवों के मिलने का सिलसिला भी जारी है। शुक्रवार को नारायणी में तमकुहीराज के एपी बांध के समीप दो व खड्डा के भैसहां घाट के समीप एक शव मिला। तीनों शव पुरुष के थे। गुरुवार को मिले तीन शवों में दो महिला व एक पुरुष का था।
कुशीनगर में नदी की धार अब भी सिर्फ पानी नहीं, बल्कि नेपाल में उजड़े जीवन की कहानी लेकर पहुंच रही है। गैस सिलेंडर, ड्रम, बेशकीमती लकड़ियां, घरेलू सामान, फर्नीचर और अन्य मलबा नदी में उतराया दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण इन सामानों को निकालने के लिए नदी किनारे पहुंच रहे हैं। लोगों की भीड़ देखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से नदी में उतरकर सामान निकालने से बचने तथा बहकर आने वाली वस्तुओं की सूचना अधिकारियों को देने की अपील की है, लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा। नदी की लहरों पर तैरता हर सामान अब एक सवाल छोड़ रहा है, नेपाल में कितने घर उजड़े और कितने अपनों का अभी तक इंतजार कर रहे हैं।
जल प्रलय की सबसे मार्मिक तस्वीर शवों के मिलने से सामने आ रही है। एसीडीआरएफ की निगरानी टीमों ने नदी में बहते इन तीन शवों को देखा और बाहर निकाला। बरामद शवों के बारे में नेपाल के पड़ोसी जनपद के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है।
बता दें कि यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आए अचानक प्रचंड बाढ़ के बाद शुरू हुई। इसका प्रवाह आगे त्रिशूली और नारायणी नदी तक पहुंचा। कुशीनगर में प्रशासन ने नदी और तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। पहले नदी के जलस्तर में संभावित तेज वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने तटवर्ती गांवों में सतर्कता बढ़ाई थी। हालांकि, जलस्तर में गिरावट के बाद तत्काल बाढ़ का खतरा कम हुआ है।
