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दुधवा में पांच गैंडों से शुरू हुआ था सफर… आज 52 का कुनबा, अब खुले जंगल में भी गूंज रही कदमों की आहट

Published: Tue, 22 Sep 2026 08:19 AM (IST)

दुधवा में विश्व गैंडा दिवस पर एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण की सफलता की कहानी सामने आई है। 1984 ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दुधवा में 1984 में पांच गैंडों से शुरू हुआ था संरक्षण।

  2. आज दुधवा में गैंडों का कुनबा बढ़कर 52 हो गया।

  3. आठ गैंडे अब दुधवा के खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण कर रहे।

हरीश श्रीवास्तव, पलियाकलां (लखीमपुर)। कभी अस्तित्व के संकट से जूझ रहे एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण की दुधवा में शुरू हुई मुहिम आज एक बड़ी संरक्षण यात्रा का रूप ले चुकी है। करीब चार दशक पहले महज पांच गैंडों से शुरू हुआ यह सफर अब 52 गैंडों के कुनबे तक पहुंच गया है। विश्व गैंडा दिवस पर दुधवा की यह कहानी बताती है कि संकल्प, संरक्षण और अनुकूल प्राकृतिक आवास मिल जाए तो संकटग्रस्त वन्यजीवों की आबादी को नई जिंदगी दी जा सकती है।

1984 में शुरू हुआ था संरक्षण का सफर

दुधवा में गैंडा पुनर्वास योजना वर्ष 1984 में शुरू की गई थी। शुरुआत में असम से पांच गैंडे लाए गए थे। इनमें दो की मौत हो गई थी। इसके बाद गैंडों की संख्या बढ़ाने और पुनर्वास योजना को आगे बढ़ाने के लिए नेपाल से चार मादा गैंडे मंगाए गए। नेपाल से आए इन गैंडों ने दुधवा में शुरुआती आबादी को मजबूत आधार दिया।

दो फेज में विकसित हुआ कुनबा

समय के साथ दुधवा में गैंडों की संख्या बढ़ती गई और पुनर्वास योजना को दो चरणों में विस्तार मिला। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार फेज-1 में 38 और फेज-2 में छह गैंडे हैं। इस तरह पुनर्वास क्षेत्रों में कुल 44 गैंडे मौजूद हैं। इसके अलावा आठ गैंडों को स्वच्छंद विचरण के लिए दुधवा के खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है। इस प्रकार कुल संख्या 52 तक पहुंच गई है।

आठ गैंडों ने छोड़ी बाड़े की सीमा

गैंडों की बढ़ती संख्या और प्राकृतिक आवास में उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें खुले जंगल में विचरण का अवसर देने की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया। अब तक अलग-अलग चरणों में कुल आठ गैंडों को स्वच्छंद विचरण के लिए जंगल में छोड़ा गया है। खुले जंगल में छोड़ने के बाद इनकी निगरानी भी की जा रही है, ताकि इनके व्यवहार, स्वास्थ्य और नए आवास में अनुकूलन पर नजर रखी जा सके।

दुधवा के घास के मैदान बने गैंडों का घर

दुधवा के घास के मैदान, जलस्रोत और दलदली क्षेत्र गैंडों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराते हैं। यहां का पुनर्वास क्षेत्र करीब 27 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसमें घासभूमि तथा साल वन का मिश्रित आवास है। यही प्राकृतिक अनुकूलता गैंडों के संरक्षण और प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण आधार बनी है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडों के प्रगति गर्व करने लायक है। बीते चार दशक में गैंडों की संख्या में 10 गुणा से ज्यादा वृदि्ध हुई है। दुधवा में गैंडों के संरक्षण की बेहतर व्यवस्था की गई है इससे उनका प्रजनन बढ़ रहा है।

-जगदीश आर, उपनिदेशक, दुधवा