लखीमपुर में उन्नत तकनीक से बढ़ेगा तिल का उत्पादन, कम लागत में किसानों की बढ़ेगी आमदनी
लखीमपुर के मोतीपुर गांव में कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को तिल उत्पादन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। इसका उद्देश्य कम लागत में अधिक उपज और बे ...और पढ़ें

उन्नत तकनीक से बढ़ेगा तिल का उत्पादन।
HighLights
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को तिल उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षित किया।
उन्नत कृषि तकनीकों से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव।
किसानों की आय बढ़ाने और मृदा स्वास्थ्य सुधारने का लक्ष्य।
संवाद सूत्र, लखीमपुर। किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय दिलाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, जमुनाबाद द्वारा विकासखंड बांकेगंज के मोतीपुर गांव में समूह प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत तिल उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने उन्नत खेती की आधुनिक तकनीकों से किसानों को अवगत कराया और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय बताए।
केंद्र के अध्यक्ष डॉ. एस. के. विश्वकर्मा ने कहा कि तिलहन फसलों का क्षेत्रफल और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र लगातार समूह प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इसके माध्यम से किसानों को समय-समय पर नई तकनीकों की जानकारी दी जाती है, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सके।
सस्य वैज्ञानिक डॉ. पी. के. बिसेन ने किसानों को उपजाऊ भूमि के चयन, मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग, उन्नत किस्मों के चयन तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में उचित जल निकासी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद सुहैल ने बीज एवं मृदा शोधन की आधुनिक तकनीकों, क्षेत्रानुसार उपयुक्त तिल की प्रजातियों के चयन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण के महत्व को विस्तार से समझाया।
वहीं प्रसार वैज्ञानिक डॉ. जियालाल गुप्ता ने खेतों की नियमित निगरानी करने और कीट एवं रोग प्रबंधन में पहले यांत्रिक तथा जैविक उपाय अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन की गुणवत्ता, तेल की मात्रा और बाजार मूल्य में वृद्धि होती है।
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पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. एन. के. त्रिपाठी ने कहा कि तिल की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जैविक पदार्थों से समृद्ध भूमि सूखे की स्थिति में भी फसल को बेहतर सहारा देती है।
पशुपालन और गौ-आधारित खेती न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि मृदा की उर्वरता और दीर्घकालीन स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाती है।
प्रशिक्षण में किसानों ने वैज्ञानिकों से विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं और उन्नत तिल उत्पादन अपनाकर आय बढ़ाने का संकल्प लिया।