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    बुंदेलखंड की बदलती तस्वीर: 14 बांधों की धरती ललितपुर अब बल्क ड्रग पार्क, मेडिकल कॉलेज और 'हर घर जल' से गढ़ रही विकास की नई तस्वीर

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 05:39 PM (GMT+05:30)

    ललितपुर जिला सूखे और पलायन की पुरानी पहचान छोड़कर विकास की नई कहानी लिख रहा है। यह क्षेत्र अब यूपी के पहले बल्क ड्रग पार्क, आधुनिक मेडिकल कॉलेज और बेह ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. यूपी का पहला बल्क ड्रग पार्क ललितपुर में आकार ले रहा।

    2. 500 बेड क्षमता वाला आधुनिक मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा।

    3. जल जीवन मिशन से 17 हजार घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचा।

    डिजिटल डेस्क, ललितपुर। बुंदेलखंड का दक्षिणी द्वार कहा जाने वाला ललितपुर जिला, जिसकी सीमाएं तीन ओर से मध्य प्रदेश (सागर, अशोकनगर और टीकमगढ़) से घिरी हुई हैं, आज सूखे और पलायन की पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर विकास की नई इबारत लिख रहा है। बेतवा, धसान, जामड़ार और शहजाद जैसी नदियों व 14 विशाल बांधों (राजघाट, माताटीला, गोविंद सागर, सजनाम आदि) की गोद में बसा यह जिला अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, हरे-भरे जंगलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। बेतवा नदी के तट पर स्थित देवगढ़ का प्रसिद्ध दशावतार मंदिर और जैन कला की अमूल्य विरासत यहाँ के गौरवशाली अतीत की गवाही देती है। वहीं अब यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश का पहला बल्क ड्रग पार्क, आधुनिक मेडिकल कॉलेज और बेहतर जल आपूर्ति जैसी परियोजनाओं के बल पर औद्योगिकीकरण और समृद्धि की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

    जल जीवन मिशन से बुझी प्यास: कचनोदा बांध से 17 हजार घरों तक पहुंचा शुद्ध पेयजल

    कभी पानी की भारी किल्लत और गंदे कुओं व हैंडपंपों के पानी पर निर्भर रहने वाले ललितपुर के ग्रामीण इलाकों में अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जल जीवन मिशन के तहत कचनोदा बांध से पानी लाकर 26 एमएलडी (MLD) क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) में उसे पूरी तरह फ़िल्टर किया जा रहा है। 17 ओवरहेड टंकियों और 8 सीडब्ल्यूआर (CWR) के माध्यम से लगभग 60 गांवों के 17,000 से अधिक परिवारों को सीधे नल से शुद्ध व मीठा पेयजल मुहैया कराया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ और भारतीय मानक (IS 10500) के तहत लैब में टीडीएस, पीएच, क्लोराइड और फ्लोराइड की नियमित जांच के बाद ही क्लोरीन युक्त पानी गांवों तक भेजा जाता है, जिससे ग्रामीणों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से मुक्ति मिली है।

    उत्तर प्रदेश का पहला बल्क ड्रग पार्क: दवा निर्माण में भारत को बनाएगा आत्मनिर्भर

    ललितपुर अब केवल कृषि या पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की फार्मा इंडस्ट्री का नया भविष्य बनने जा रहा है। जिले में 1,472 एकड़ में प्रदेश का पहला 'बल्क ड्रग पार्क' आकार ले रहा है। जीवनरक्षक दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) के लिए देश को विदेशों पर निर्भर न रहना पड़े, इस दिशा में यह पार्क एक मजबूत कदम है। इस विशाल औद्योगिक परियोजना से हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, भारी निवेश आएगा और बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को एक नया आधार मिलेगा। इसके साथ ही, जिले में प्रस्तावित नए एयरपोर्ट के लिए निजी भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और रक्षा विभाग की एनओसी मिलते ही निर्माण कार्य में और तेजी आएगी।

    स्वास्थ्य सेवाओं में नया मील का पत्थर: 500 बेड क्षमता वाला स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज

    जिले की स्वास्थ्य प्रणाली में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पहले जहाँ केवल 140 बेड का जिला अस्पताल हुआ करता था, वहीं वर्ष 2021 में स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई और 300 बेड का नया अस्पताल भवन तैयार किया गया। वर्ष 2024 से यहाँ एमबीबीएस छात्रों के पठन-पाठन की शुरुआत हो चुकी है और अब अस्पताल की क्षमता बढ़ाकर 500 बेड कर दी गई है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 60-70 सीटी स्कैन, करीब 200 एक्स-रे, 60 से अधिक अल्ट्रासाउंड, 18 बेड का फ्री डायलिसिस सेंटर (जिसे 25 बेड किया जा रहा है) और 5 बेड का कैंसर वार्ड संचालित है। यहाँ डिजिटल लैब, आधुनिक ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू जैसी मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध होने से गरीब मरीजों को बड़े शहरों की ओर भागने की मजबूरी से मुक्ति मिली है।

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    ओडीओपी से चमकी जरी सिल्क साड़ी और 'गोता दाल', एआई व तकनीक से हुनर को मिला नया मंच

    ललितपुर की पहचान यहाँ की पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों से भी है। 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत यहाँ की हाथ से बुनी जरी सिल्क साड़ी को नया वैश्विक बाजार मिला है। 5 से 20 दिनों की बारीक मेहनत से तैयार होने वाली इन साड़ियों की कीमत 3,000 से शुरू होकर कढ़ाई के अनुसार बढ़ती जाती है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भी इन साड़ियों को प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में ओडीओपी के तहत दलहन प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहाँ उत्पादित उड़द की प्रसिद्ध 'गोता दाल' दक्षिण भारत से लेकर विदेशों तक निर्यात की जा रही है।

    युवा उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और 90 साल पुरानी 'ग्वाला की बर्फी' की मिसाल

    मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत 21 से 40 वर्ष के युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है, जिससे 2,300 से अधिक युवाओं ने रिपेयरिंग सेंटर, बेकरी और फूड प्रोसेसिंग जैसी इकाइयां शुरू की हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी) और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत हजारों बेघर परिवारों को पक्के मकान दिए गए हैं, जबकि मनरेगा में 3.71 करोड़ से अधिक मानव दिवस सृजित कर 1.38 लाख से ज्यादा परिवारों को 100 दिन का रोजगार दिया गया है।

    महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा 'प्रेरणा कैंटीन' का सफल संचालन किया जा रहा है, जहाँ स्वादिष्ट और कम कैलोरी वाला डोसा-इटली परोसा जाता है। इसके साथ ही, ललितपुर की 90 साल पुरानी शुद्ध मावे से बनने वाली 'ग्वाला की बर्फी' अपनी चौथी पीढ़ी के साथ बिना किसी मिलावट के आज भी अपनी मिठास और परंपरा को संजोए हुए है।