एंबुलेंस न मिलने पर पत्नी के शव को व्हीलचेयर पर 8 किमी तक ले गया पति, ललितपुर में सिस्टम की नाकामी पर सन्न रहे लोग
ललितपुर में एम्बुलेंस न मिलने पर एक पति को अपनी मृत पत्नी का शव व्हीलचेयर पर 8 किलोमीटर तक ले ...और पढ़ें

एंबुलेंस नहीं मिली तो पत्नी का शव व्हीलचेयर पर बांधकर आठ किलोमीटर ले गया पति।
HighLights
पति ने मृत पत्नी का शव 8 किमी व्हीलचेयर पर ढोया।
मेडिकल कॉलेज ने एम्बुलेंस देने से मना किया, परिवार मजबूर।
ललितपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुली, अमानवीय घटना।
ब्यूरो, ललितपुर। मेडिकल कॉलेज परिसर से एक बेहद झकझोर देने वाली और अमानवीय तस्वीर सामने आई है। यहाँ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक घटना में एक महिला की मौत के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए एम्बुलेन्स या कोई अन्य वाहन नहीं मिला।
मजबूरी में पति अपनी मृत पत्नी के शव को व्हीलचेयर पर बैठाकर और उसे व्हीलचेयर से बांधकर करीब आठ किलोमीटर दूर अपने घर गदयाना ले जाने को विवश हो गया। रास्ते भर लोगों की भीड़ इस लाचारी को देखकर सन्न रह गई।
गदयाना निवासी राजू सेन पुत्र करन ने बताया कि उसकी 35 वर्षीय पत्नी रश्मि की तबीयत काफी समय से खराब चल रही थी। करीब दो साल पहले उसने अपनी मामी रश्मि से शादी की थी। रश्मि की पहली शादी करीब 15 साल पहले राजपुर कोटरा में हुई थी, जिससे उसके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की है। महिला का बेटा उसके साथ ही रहता था। राजू मजदूरी करता था और पत्नी भीख मांगती थी।
दोनों रेलवे स्टेशन के पास ही अपना आशियाना बनाए हुए थे और मेडिकल कॉलेज के अन्नपूर्णा भोजनालय में खाना खाते थे। करीब पांच महीने पहले रश्मि ने एक बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन बीमारी के कारण वह सिर्फ एक महीना ही जीवित रह सका। बच्चे की मौत के बाद उसे गोविन्द सागर बांध के पास दफना दिया गया था।
इस सदमे और बीमारी के बाद से रश्मि लगातार बीमार रहने लगी। उसके शरीर में खून की कमी हो गई थी और गम्भीर इन्फेक्शन फैल गया था। इलाज के लिए उसे झांसी तक ले जाया गया और खून भी चढ़वाया गया, लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ।
पीडि़त ने मेडिकल कॉलेज प्रबन्धन पर लगाए आरोप
शुक्रवार की सुबह रश्मि ने सीने में तेज घबराहट होने की बात कही, जिसके बाद राजू उसे लेकर सीधे मेडिकल कॉलेज के इमरजेन्सी वार्ड पहुंचा। यहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में मौत की पुष्टि होने के बाद जब उन्होंने शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से गाड़ी या एम्बुलेन्स की गुहार लगाई, तो उनकी एक नहीं सुनी गई। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं मिला।
अस्पताल प्रशासन की तरफ से वाहन न मिलने के कारण दुखी और असहाय परिजनों को अपने ही स्तर पर शव को घर ले जाने के लिए यह अमानवीय रास्ता चुनना पड़ा।
स्वास्थ्य सुविधाओं की सामने आई हकीकत
स्वास्थ्य विभाग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और हर मरीज को समय पर सहायता मिलने के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं इस तरह की घटनाएं इन दावों की पोल खोल देती हैं। आपातकालीन स्थिति में मृत व्यक्ति के परिजनों को मेडिकल कॉलेज से वाहन न मिलना सीधे तौर पर व्यवस्था की बड़ी चूक को दर्शाता है, जिससे आम जनता में गहरा रोष व्याप्त है।
महिला 11:30 बजे अस्पताल आई थी, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया था। अस्पताल की तरफ से पोस्टमार्टम कराने और शव को मॉर्चुरी ले जाने के लिए कहा गया था, लेकिन परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे और शव को वैसे ही बिना पोस्टमार्टम कराए ले गए। अस्पताल प्रबन्धन और अन्य लोगों ने परिजनों को गाड़ी और एम्बुलेन्स भिजवाने की बात कही थी। -डॉ.गजेन्द्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज, ललितपुर।
