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मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जागी गोमती नदी के साफ होने की ‍उम्मीद, सामने बड़ी चुनौतियां भी

Updated: Mon, 31 Aug 2026 06:56 PM (IST)

River Gomti:

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने रविवार को घोषणा की थी कि इस वर्ष के अंत तक दिखेगा सुधार 

  2. गोमती का जल स्वच्छ होने से गंगा नदी को भी मिलेगी प्रदूषण से थोड़ी राहत

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रविवार को घोषणा के बाद से लखनऊ की जीवन धारा गोमती नदी को इस वर्ष के अंत तक फिर से संवरने की उम्मीद जगी है। गोमती का पानी साफ होगा तो गंगा नदी को भी प्रदूषण से राहत मिलेगी, क्योंकि गाजीपुर के सैदपुर में गोमती नदी गंगा से ही मिलती है।

गोमती नदी के जल को निर्मल बनाना बड़ी चुनौती है। सरकारी तंत्र जिस धीमी गति से गोमती नदी को सीवर से मुक्त करने का काम कर रहा है, वह तो काफी विलंबित करने वाला प्रोजेक्ट लग रहा है। अभी नगर निगम के वार्ड वार यह रिपोर्ट ही नहीं तैयार हो पाई है कि कहां से कितना सीवर गोमती नदी में जा रहा है।

ड्रोन सर्वे में नए 12 नालों को गोमती नदी में गिरने से रोकना भी बड़ी चुनौती है। जलनिगम, नगर निगम व जलकल विभाग की तरफ से गोमती नदी को साफ करने की दिशा में सुस्त कार्य पर मंडलायुक्त विजय विकास पंत की नाराजगी जता चुके हैं। शहर में 13 सौ स्थानों पर सीवर नालियों में जा रहा है या फिर नाली सीवर से जुड़ी है। यह रिपोर्ट भी शहर में सीवर प्रबंधन का काम देख रही मेसर्स सुएज कंपनी ने तैयार की है।

इसके बाद मंडलायुक्त ने जलकल विभाग से तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पहली है हर वार्ड के मोहल्ले से सीवर से जुड़ी जानकारी देना है। कितना सीवर पाइप के माध्यम एसटीपी में जा रहा है और कितना प्रतिशत नालों के माध्यम से एसटीपी में पहुंच रहा है। मोहल्लों का सीवर कितना नालों के माध्यम से नदी जल में घुल जा रहा है। इस रिपोर्ट को अलग-अलग रंग में तैयार किया जाना था।

छठ पूजा महोत्सव में की थी घोषणा

गोमती तट पर पिछले वर्ष आयोजित छठ महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे और गोमती नदी की दुर्दशा ने उनकी चिंता को बढ़ा दिया था। उन्होंने मंच से ही गोमती नदी को साफ और निर्मल बनाने की घोषणा की थी और इसकी जिम्मेदारी लखनऊ के मंडलायुक्त को दी थी। इसके बाद बैठक में मंडलायुक्त ने नालियों व अन्य माध्यम से नदी में रहे सीवर की मोहल्लों के हिसाब से रिपोर्ट मांगी थी। इस पर तीन फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती नदी सफाई योजना की समीक्षा बैठक बुलाई थी और नदी में घुल रहे सीवर की विस्तार से रिपोर्ट देने को कहा था।

गोमती नदी में 400 एमएलडी सीवर

नगर निगम क्षेत्र के 52 प्रतिशत इलाकों में सीवर लाइन नहीं है और यह सीवर नालियों व नालों में जा रहा है, जो गोमती नदी में मिल रहा है। घरों व भवनों में बने सेफ्टिक टैंक की सफाई के बाद भी सीवर को किसी नाले में फेंका जाता है, जो कहीं-कहीं गोमती नदी के जल को प्रदूषित करती है।नगर निगम सीमा का क्षेत्रफल 560.48 वर्ग किलोमीटर है, जबकि सीवर लाइन 243.56 वर्ग किलोमीटर में ही है, जो शहरी क्षेत्र का 41.9 प्रतिशत है। 291.70 वर्गकिलोमीटर में सीवर लाइन का नेटवर्क नहीं है, जो 52 प्रतिशत है।

32 में से छह नालों का पानी सीधा गोमती में

आधा दर्जन नालों का पानी अभी भी सीधे गोमती में जा रहा है।पीलीभीत के माधोटांडा से निकली गोमती नदी तो साफ नजर आती है, लेकिन लखनऊ में प्रवेश करते ही उसका संपर्क नालों से होने लगता है। अपस्ट्रीम में नगरिया, पाटानाला, वजीरगंज और सरकटा नाला नदी में ही गिर रहे हैं। डाउनस्ट्रीम में हैदरकैनाल और कुकरैल नदी भी गिर रही है। यहां पर पानी को शुद्ध करने के इंतजाम हैं लेकिन तेल चोरी करने के कारण जनरेटर नहीं चलाया जाता है।

तीन हजार करोड़ खर्च के बाद भी नहीं सुधरी दशा

अगर चार दशक की बात कही जाए तो गोमती नदी को संवारने पर तीन हजार करोड़ की रकम खर्च हो चुकी है। 2015 में अखिलेश सरकार गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट लाई थी। 656 करोड़ की इस योजना में 1435 करोड़ खर्च होने के बाद भी साठ से सत्तर प्रतिशत ही काम हो पाया था। 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद रिवर फ्रंट को लेकर सवाल उठे थे और योगी ने खुद ही गोमती नदी और वहां हुए कार्यों का निरीक्षण करते हुए बड़े पैमाने पर अनियमितता पाई थी। मामले की जांच सीबीआई को दी गई थी और सिंचाई विभाग के कई अधिकारियों को जेल भी जाना पड़ा था। यह जांच आज भी चल रही है

गोमती नदी को संवारने का मास्टर प्लान तैयार

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गोमती में सीवर को रोकने के लिए नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का काम हो रहा है। ड्रोन सर्वे के बाद गोमती में गिरने वाले 45 नालों की पहचान हुई है। सीवर का शोधन करने के बाद ही उसे नदी में जाने के लिए एसटीपी बनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोमती नदी करीब 30 किलोमीटर की लंबाई में प्रवाहित होती है।

नगर निगम के रिकार्ड में गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले चिह्नित किए गए। 45 नालों में से 12 से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। पांच नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। गोमती के पुनरुद्धार के लिए तैयार प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट में नालों को अलग-अलग एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने का प्रस्ताव है।

जल स्वच्छ होने से गंगा नदी को भी मिलेगी प्रदूषण से थोड़ी राहत

इसके तहत अवशेष 28 नालों (अनटैप्ड एवं आंशिक टैप्ड) को टैप किए जाने के लिए 160 एमएलडी बसंतकुंज, 65 एमएलडी वजीरगंज, 150 एमएलडी जियामऊ, 65 एमएलडी नीलमथा में एसटीपी निर्माण, मस्तेमऊ नाले पर नेचर बेस्ड तकनीक, पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता के माड्यूलर एसटीपी के माध्यम से शोधन के लिए कार्य योजना चल रही है।

इसके साथ ही भरवारा एसटीपी के अपग्रेडेशन और उससे जुड़े 19 नालों की आवश्यक मरम्मत और दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन के साथ उससे जुड़े दो नालों की आवश्यक मरम्मत का काम भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है। गोमती नदी का समुचित तरह से सुधार करने की योजना छह मई 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) नई दिल्ली को भेजी जा चुकी है।