बलरामपुर अस्पताल को बनाया जाएगा मेडिकल कॉलेज, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अस्पताल प्रशासन से मांगा प्रस्ताव
बलरामपुर अस्पताल मंगलवार को 157 वर्ष का हो गया। प्रदेश के सबसे पड़े एवं पुराने जिला अस्पताल के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डिप् ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल मंगलवार को 157 वर्ष का हो गया। प्रदेश के सबसे पड़े एवं पुराने जिला अस्पताल के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा, बलरामपुर अस्पताल जल्द मेडिकल कालेज बनेगा। अस्पताल प्रशासन इसका प्रस्ताव बनाकर शासन भेजे, बाकी की काम हम करेंगे। मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की दिशा में हर संभव सुविधाएं शुरू की जाएंगी। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में राज्यमंत्री चिकित्सा शिक्षा मयंकेश्वरशरण सिंह भी मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री ने इस मौके पर अस्पताल में कई सुविधाओं का शुभारंभ भी किया।
आईसीयू की सुविधा सुधारें
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्थापना दिवस समारोह के दौरान अस्पताल की छतों पर लगे 650 किलोवाट के सोलर पैनल का शुभारंभ किया, जिससे प्रतिमाह लगभग छह लाख रुपये की बिजली का उत्पादन होगा। ऐसे में अब बिजली की वजह से किसी मरीज का इलाज प्रभावित नहीं होगा। वार्ड-11 में गंभीर रोगियों को एक से दूसरे तल पर शिफ्ट करने के लिए रैंप से नहीं जाना होगा।
डिप्टी सीएम ने नई लिफ्ट का भी उद्घाटन किया। उपमुख्यमंत्री ने डाक्टरों और नर्सिंग स्टाफ समेत सभी कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि टीम की तरह काम करें। मरीज को परिवार के सदस्य की तरह मानें तभी सेवा का भाव आएगा। इस दौरान अस्पताल प्रशासन की ओर से दी गई बुकलेट में डायलिसिस के लिए पांच दिन की प्रतीक्षा सूची पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी कि गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज मुहैया कराएं।
इसके लिए यदि अतिरिक्त डायलिसिस मशीन भी लगाना हो तो बढ़ाएं, बजट की कोई कमी नहीं है। हालांकि, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि डायलिसिस के लिए अब कोई वेटिंग नहीं है। मशीनों की संख्या बढ़ने के बाद आसानी से एक दिन में ही डायलिसिस हो रही है।
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बिना इलाज के न लौटे कोई मरीज
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित करते हुए कहा, यह सुनिश्चित करें कि इमरजेंसी में आने वाला कोई भी मरीज बिना उपचार के वापस न लौटे। अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव है, ऐसे में कई बार बेड खाली नहीं होने पर अतिरिक्त बेड लगाएं। क्योंकि रेफर के चक्कर में मरीज की जान जा सकती है। गंभीर रोगियों की मदद के लिए गेट पर दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगाएं और इसकी नियमित निगरानी एवं जवाबदेही तय करें। कार्यक्रम में निदेशक डा. कविता आर्या, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ल, केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डा. सूर्यकांत समेत कई चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहा।