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पसमांदा से लेकर प्रबुद्ध वर्ग तक नजर, भाजपा की नई टीम में यूपी के दो मुस्लिम चेहरे, 2027 पहले बीजेपी ने दिया बड़ा संदेश

Published: Tue, 18 Aug 2026 09:04 AM (IST)

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से प्रोफेसर तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को शामिल किया गया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में दो मुस्लिम चेहरे।

  2. प्रोफेसर तारिक मंसूर, कुंवर बासित अली उत्तर प्रदेश से।

  3. पसमांदा और प्रबुद्ध मुस्लिम वर्गों को साधने का प्रयास।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राजनीतिक प्रयोगशाला में नए प्रयोग करते हुए भाजपा हवा का मिजाज परखती रहती है। राष्ट्रीय टीम में शामिल दोनों मुस्लम चेहरे उत्तर प्रदेश से लिए गए हैं, जिसका चुनावी संदेश साफ है। लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए अलीगढ़ के प्रोफेसर तारिक मंसूर के जरिए जहां भाजपा ने बुद्धिजीवी मुस्लिमों में भरोसा पैदा करने का प्रयास किया है, वहीं अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली की जमीनी छवि पार्टी के लिए चुनावी समीकरणों को सरल करेगी।

पार्टी के जानकारों का कहना है कि दोनों मुस्लिमों के जरिए भाजपा की वोटों से ज्यादा नजर अल्पसंख्यक समाज में संदेश देने पर है। भाजपा की राष्ट्रीय इकाई में अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान तीसरी बार यूपी के हाथ में आई है। कुंवर बासित अली से पहले कानपुर के तनवीर हैदर उस्मानी और लखनऊ के एजाज रिजवी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं।

मेरठ के रहने 40 साल के कुंवर बासित अली मिलनसार व्यवहार, राष्ट्रवादी दृष्टि और पसमांदा मुसलमानों के बीच जमीनी काम करने की वजह से हाइकमान का भरोसा जीतने में कामयाब रहे। पार्टी के मूल कैडर के बासित ने अपना राजनीतिक सफर अल्पसंख्यक मोर्चे के मंडल अध्यक्ष से शुरू किया था, जिसके बाद वह जिलाध्यक्ष, दो बार जिला मीडिया प्रभारी, क्षेत्रीय संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचे।

पसमांदा मुसलमानों को साधने के लिए बासित ने मुरादाबाद, रामपुर से लेकर बरेली समेत कई शहरों में सम्मेलन कराया। भले ही मुस्लिम वोट पार्टी को नहीं मिला, लेकिन इस बहाने समाज के बीच मोदी और योगी सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने में सफलता मिली। अल्पसंख्यक मोर्चे के आकलन के अनुसार प्रदेश में 15 प्रतिशत मुस्लिम कन्वर्टेड हैं, जिनके बीच राष्ट्रवादी विचारधारा और ‘सबका साथ-सबका विकास’ का संदेश पहुंचाने पर फोकस होगा। बासित ने ‘शुक्रिया मोदी भाईजान’ नामक अभियान भी चलाया था।

सदस्यता अभियान में भी बढ़चढ़कर भाग लिया। उधर, पेशे से वरिष्ठ सर्जन रहे प्रोफेसर मंसूर के पास शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासन का चार दशकों से अधिक का अनुभव है। वह 2023 से 2026 तक पद्म पुरस्कार समिति के सदस्य भी रहे। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने प्रबुद्ध और पसमांदा मुस्लिम वर्ग के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने का संकेत दिया है। पार्टी मंसूर की नियुक्ति के जरिए चुनावों और सांगठनिक अभियानों में सर्वसमावेशी एजेंडे को मजबूत करेगी।

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