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देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ चलेगा मुकदमा, इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त

Updated: Sun, 23 Aug 2026 08:05 PM (IST)

Allahabad High Court: कोर्ट ने कहा कि गोंडा (देवीपाटन) की मंडलायुक्त वरिष्ठ आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल का जज को फोन करके उन पर डाला गया कथित दबाव प्रथमदृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

देवीपाटन की मंडलायुक्त वरिष्ठ आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल

देवीपाटन की मंडलायुक्त वरिष्ठ आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल 

HighLights

  1. जज को फोन करने के प्रकरण पर हाई कोर्ट गंभीर, वरिष्ठ आईएएस अफसर पर चलेगा मुकदमा

  2. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामला आपराधिक अवमानना वाद के लिए किया संदर्भित

विधि संवाददाता, लखनऊ। गोंडा में लंबे समय से लंबित भूमि विवाद की सुनवाई कर रहीं सिविल जज शबीना खान को कथित तौर पर प्रभावित करने के प्रयास को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंड पीठ ने गंभीरता से लिया है।

कोर्ट ने कहा कि गोंडा (देवीपाटन) की मंडलायुक्त वरिष्ठ आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल का जज को फोन करके उन पर डाला गया कथित दबाव प्रथमदृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है और न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न करता है।

न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने शुक्रवार को यह आदेश ज्योति विद्या मंदिर स्कूल की ओर से नगर पालिका परिषद गोंडा के खिलाफ 1997 से लंबित नियमित वाद को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें न्यायिक कार्यवाही से जुड़े मामलों में न्यायाधीशों को धमकी या दबाव देने को गंभीरता से लिया गया है।

हाई कोर्ट ने कहा कि मामले को आपराधिक अवमानना के तहत विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य न्यायाधीश अथवा वरिष्ठ न्यायाधीश से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने के बाद मामले को उपयुक्त अदालत के समक्ष रखा जाए। मामला देवीपाटन मंडल के आयुक्त के नाम दर्ज कई नजूल भूमि के टुकड़ों से संबंधित है।

मंडलायुक्त की ओर से कोर्ट के समक्ष रखे गए पक्ष के अनुसार, उक्त भूमि कार्यालय भवन और अन्य सरकारी प्रयोजनों के लिए आरक्षित थी। आरोप लगाया गया कि इस भूमि पर स्कूल भवन का निर्माण कर दिया गया और विवाद करीब तीन दशक से सिविल कोर्ट में लंबित है।

वाद साक्ष्य के चरण में लंबित है और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी है। स्कूल ने आरोप लगाया था कि राज्य के अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर अदालत पर अनुचित दबाव बना रहे हैं। इसी आधार पर वाद को देवीपाटन मंडल से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

इस बीच विवाद तब और गंभीर हो गया जब गोंडा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान ने मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के साथ गत 15 जुलाई को हुई कथित टेलीफोन बातचीत की जानकारी दी। जज के अनुसार, बातचीत में उनकी छुट्टी के साथ-साथ उनकी अदालत में लंबित मामले का भी संदर्भ आया था।

इसके बाद सिविल जज के आग्रह पर जिला जज ने यह वाद समान क्षेत्राधिकार वाली गोंडा की ही दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दिया। इससे स्कूल की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल स्थानांतरण याचिका तो स्वत: निष्प्रभावी हो गई, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि फोन काल से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

जज शबीना खान के बताए गए बातचीत के लहजे और भाषा से प्रथमदृष्टया सीधा आभास मिलता है कि उन्हें बतौर पीठासीन अधिकारी प्रभावित करने का प्रयास किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मंडलायुक्त ने फोन करने से इन्कार नहीं किया है। हाई कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि लंबित मुकदमे के संदर्भ में कोई पक्षकार कैसे इस तरह फोन करके अदालत से संपर्क कर सकता है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ अदालतों को अपमान और दबाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए तथा पीठासीन अधिकारियों को बिना किसी भय के अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। किसी व्यक्ति, पक्षकार या अधिवक्ता द्वारा अदालत पर दबाव बनाने का कोई भी प्रयास न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।