Diwali Puja in UP LIVE: दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि, आपके शहर का शुभ मुहूर्त
Uttar Pradesh Deepawali LIVE Updates: प्रदेश के विभिन्न शहरों में दीवाली का जश्न, लक्ष्मी गणेश पूजन, दीपावली पूजन दीवाली जश्न का लाइव अपडेट्स

Uttar Pradesh Deepawali LIVE Updates:
उत्तर प्रदेश में दीपावली LIVE अपडेट्स| डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर भारत के प्रमुख त्योहारों में शुमार दीपावली का पर्व आज के ही दिन मनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी दीपावली त्योहार की रौनक घर-घर में छा रही है। इस ब्लॉग में आपको आपके शहर (लखनऊ, आगरा, कानपुर, मेरठ, वाराणसी, प्रयागराज समेत अन्य जिले) के अनुसार दीवाली पूजन, लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहुर्त और महापर्व का उत्सव मनाए जाने के लाइव अपडेट्स दिए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में दीपावली जश्न की विशेष झलकियां LIVE Updates-
भगवान कुबेर का आह्वान इस मंत्र से करें
-ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
धातु की प्रतिमा सर्वोत्तम
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिषी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि श्रीगणेश, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की नई प्रतिमा या विग्रह की स्थापना करें। घर में नित्य पूजन के लिए धातु की प्रतिमा हो तो उसका पूजन सर्वोत्तम होता है। कलश स्थापना कर भगवती महालक्ष्मी को श्रीसूक्त के पाठ के साथ कमल का पुष्प, कुमकुम, इत्र, और खीले-बताशे का भोग लगाएं।
पूजन के शुभ मुहूर्त
- आठ नवंबर, रविवार शाम का शुभ मुहूर्त : 5:24 से रात 10:19 बजे
- महानिशीथ काल : रात 11:32 से 12:24 बजे
- रात का लाभ मुहूर्त : 1:36 से 3:15 बजे
- नौ नवंबर की सुबह का शुभ मुहूर्त : 4:53 से 6:32 बजे
दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं: ज्योतिषाचार्य
ज्योतिषाचार्य पंडित संजय शर्मा ने बताया कि दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। इस दिन घरों के साथ कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में भी लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है। व्यापारी अपने बहीखातों और तिजोरी का पूजन कर कारोबार में उन्नति की कामना करते हैं। पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों को आरती में शामिल होना चाहिए। इससे आपसी प्रेम, सौहार्द और खुशहाली का संदेश मिलता है।
लक्ष्मी-गणेश की पूजा विधि
श्रीनाथ ज्योतिष संस्थान के आचार्य पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि दीपावली पर सुबह घर की अच्छी तरह साफ-सफाई कर पूजा स्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं।
- शाम को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को गंगाजल, रोली, अक्षत, पुष्प और इत्र अर्पित करें।
- गणेश जी को दूर्वा और मोदक तथा मां लक्ष्मी को कमल या गुलाब का फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर फल और मिष्ठान का भोग लगाएं। कुबेर देव का स्मरण कर धन-समृद्धि की कामना करें। अंत में परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें।
- घर के मुख्य द्वार, आंगन, छत और पूजा स्थल पर दीप जलाएं।
वृषभ लग्न के दौरान महालक्ष्मी पूजन विशेष शुभ
रामपुर के स्थानीय पंचांग के अनुसार, इस बार लक्ष्मी-गणेश पूजन का मुख्य शुभ मुहूर्त शाम 5:46 से रात 7:42 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्थिर वृषभ लग्न और प्रदोष काल का विशेष संयोग बन रहा है। कार्तिक अमावस्या तिथि आठ नवंबर को सुबह 11:27 बजे से शुरू होकर नौ नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल शाम 5:24 से रात 8:01 बजे तक रहेगा। गृहस्थों के लिए प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न के दौरान महालक्ष्मी पूजन विशेष शुभ माना गया है।
संभल में 7:50 बजे तक बेहद शुभ समय
चंदौसी: आचार्य ऋतुपर्ण शर्मा ने बताया कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक का समय बेहद शुभ है। कार्तिक अमावस्या की तिथि आठ नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर नौ नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।
शास्त्रों के अनुसार, दीपावली की रात्रि में जागकर भगवती लक्ष्मी के श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र, गोपाल सहस्त्रनाम आदि स्रोतों का पाठ करना तथा बेलपत्र व कमलगट्टे से होम (आहुति) देना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। गृहस्थ जीवन वाले लोगों के लिए इस अवधि में पूजन करना सबसे उत्तम माना जाता है। व्यापारी वर्ग अपनी दुकानों, प्रतिष्ठानों और फैक्ट्रियों में भी इसी दौरान पूजन कर सकते हैं।
यह है पूजन का शुभ मुहूर्त
पं. महेश शुक्ल ने बताया कि दीपावली में लक्ष्मी पूजन में स्थिर लग्न की विशेष प्रधानता होती है। प्रदोष एवं रात्रि व्यापिनी कार्तिक कृष्ण अमावस्या में ही दीपावली का प्रसिद्ध पर्व आठ नवंबर रविवार को पूरे देश में एक साथ मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजा के लिए तीन मुहूर्त निर्धारित किए जा रहे हैं।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जहां दिन में ही लक्ष्मी पूजन किया जाना हो वहां स्थिर कुंभ लग्न दोपहर एक से 2:31 बजे तक। सर्वोत्तम प्रदोष काल का स्थिर वृषभ लग्न सायं 5:37 से 07:31 बजे तक रहेगा। महानिशा में काली पूजन एवं तंत्र मंत्र सिद्धि के लिए स्थिर सिंह लग्न रात 12:05 से 02:11 बजे तक रहेगा।
श्रीगणेश माता लक्ष्मी का पूजन आठ नवंबर की शाम
सीतापुर के दुर्गा देवी मंदिर के पं. महेश शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष कार्तिक अमावस्या की तिथि आठ नवंबर को सुबह 1.27 बजे शुरू होगी जोकि नौ नवंबर की दोपहर 12:30 बजे तक रहेगी। जहां दीपावली पर श्रीगणेश माता लक्ष्मी का पूजन आठ नवंबर की शाम से रहेगा, वहीं स्नान दान की अमावस्या नौ नवंबर को रहेगी।
माता लक्ष्मी जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम को निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर तुम रहती सब सद्गुण आता
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
मां काली का भी पूजन
कानपुर: दीपावली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के साथ मां काली का पूजन भी होगा। कार्तिक अमावस्या की आधी रात को शुरू होने वाली काली पूजा में भक्ति, परंपरा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
बड़े दीपक से जलाएं पूरे घर के दीप
आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि आंगन में रंगोली बनाकर वहां बड़ा दीपक रखें और उस दीपक से पूरे घर में दीपक जलाएं। इसी बड़े दीपक से काजल भी बनाया जाता हैं। बड़े दीपक की लौ पर कच्चे बड़े दीपक से बनता है।
प्रदोष काल का मुहूर्त
लखनऊ: आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि काली पूजा और तांत्रिक साधना के लिए महानिशीथ काल रात 11:24 से 12:16 बजे तक श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की आराधना से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
लखनऊ में दीवाली पूजा का मुहूर्त
लखनऊ: श्री गणेश और महालक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न का मुहूर्त श्रेष्ठ रहेगा। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि घरों में महालक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल शाम 5:19 से 7:56 बजे तक रहेगा। वहीं वृषभ लग्न शाम 5:42 से 7:39 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करना शुभ रहेगा।
उन्होंने बताया कि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और कार्यालयों में दिन में पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:28 से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा कुंभ लग्न दोपहर 1:19 से 2:39 बजे तक है। ईष्ट साधना और सिद्धि के लिए सिंह लग्न रात 12:12 से 2:27 बजे तक रहेगा।
दीपावली पर पटाखों के धुएं और धमाकों से बचें, सेहत का रखें ध्यान
दीपावली पर आतिशबाजी का शोर और पटाखों से निकलने वाला धुआं बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। उन्हें पटाखों के धुएं और तेज धमाकों से दूर रहना चाहिए।
मेडिकल कालेज के फिजीशियन डॉ. कमलेंद्र वर्मा के मुताबिक, पटाखों का धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। अस्थमा और सांस के रोगियों को इसके सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। धुआं घर में न आए, इसके लिए दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। संपर्क में आने से खांसी, घबराहट या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत वहां से दूर चले जाएं। सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या चक्कर आने पर अस्पताल जाएं।
महिला रोग विशेषज्ञ डाक्टर सुप्रिया मिश्रा ने बताया कि पटाखों के धुएं में मौजूद बारीक कणों से खांसी, गले में जलन, सांस फूलने और घरघराहट की समस्या हो सकती है। हवा में प्रदूषण कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर भी असर डाल सकता है। बारीक पार्टिकुलेट मैटर सूजन बढ़ाकर ब्लड वेसल के सामान्य काम में बाधा डाल सकते हैं।
गर्भावस्था में दिल और सर्कुलेटरी सिस्टम मां और बढ़ते बच्चे को सहारा देने के लिए पहले से अधिक मेहनत कर रहे होते हैं। ऐसे में इन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव मां और गर्भस्थ शिशु के लिए ठीक नहीं है। गर्भवती महिलाएं पर्व की खुशियों के बीच अपनी और गर्भस्थ शिशु की सेहत का विशेष ध्यान रखें।
पटाखा छुड़ाते समय यह बरतें सतर्कता
- छोटे बच्चों के साथ घर का कोई बड़ा सदस्य भी साथ में रहे।
- चश्मा लगाकर ही पटाखे छुड़ाएं। कम विस्फोटक क्षमता वाले पटाखे ही छुड़ाएं।
- अपने बच्चों को पटाखे जलाते समय हमेशा कॉटन और फिटिंग वाले कपड़े ही पहनाएं।
- पटाखे जलाते समय बच्चों के पैरों में चप्पल की जगह बंद जूते पहनाएं।
- खुले आसमान के नीचे ही पटाखे जलाएं।
- आसपास कोई ज्वलनशील वस्तु (सूखे पत्ते, घास, लकड़ी, गैस सिलेंडर या वाहन) न हो।
- अपने आसपास पानी की बाल्टी और रेत तैयार रखें।
दीपावली पर आज मोक्ष कल्याणक और बंदी छोड़ दिवस
दीपावली का पर्व रविवार को शहर में रोशनी और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन जैन समाज भगवान महावीर के निर्वाण दिवस को मोक्ष कल्याणक महोत्सव के रूप में मनाएगा, जबकि सिख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में 52 राजाओं की मुक्ति की ऐतिहासिक घटना को याद करेगा। दूसरी ओर बंगाली समाज में दीपावली की रात मां काली की विशेष पूजा-अर्चना होगी।
कमल के फूल 50 से 70 रुपये जोड़ा

लखीमपुर। पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए संकटा देवी फूल बाजार में भी ग्राहक पहुंचे। कमल के फूल, कमल गट्टा और वैजयंती की माला खूब बिकी। फूल विक्रेता तुषार सैनी और शुभम सैनी के मुताबिक, कमल का फूल 50 से 70 रुपये जोड़ा, गेंदे की झालर 40 से 60 रुपये और वैजयंती की माला 70 से 100 रुपये जोड़ा बिकी।
बलरामपुर जिले में गणेश-लक्ष्मी पूजन के लिए मुहूर्त
दीपावली के दिन अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का अद्भुत संयोग बन रहा है। इसे गृहस्थों, व्यापारियों और साधना करने वालों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। दीपावली के दिन प्रदोष काल में गणेश-लक्ष्मी पूजन किया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में दीपावाली पूजन के लिए प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल का एक ही तिथि में मिलना सर्वोत्तम माना जाता है, जो कि आठ नवंबर को है।
पंडित बजरंगी प्रसाद के अनुसार, शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक प्रदोष काल और वृषभ लग्न रहेगा। यह समय मां लक्ष्मी और गणेश पूजन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। गणेश-लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से शाम 7:50 बजे तक रहेगा। व्यापारी वर्ग कारखानों या फैक्ट्री में दिन के समय गणेश-लक्ष्मी पूजन का समय कुंभ लग्न में दोपहर एक बजकर 27 मिनट से दोपहर 02:54 तक रहेगा।
आतिशबाजी करने को लोगों में बेकरारी

प्रकाश पर्व दीपावली पर आतिशबाजी करने को लोगों में बेकरारी देखी जा रही है। सबसे ज्यादा नन्हे-मुन्नों में इसका उत्साह है। दीपावली पर पटाखे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी है। छोटी दीपावली के दिन भी लोगों ने बाजारों में जमकर खरीदारी की।
अमावस के काजल का क्रेज आज भी
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के चलते आधुनिक युग में हुए तमाम परिवर्तनों के बावजूद बाजार में उपलब्ध तरह-तरह के प्रसाधन के साधनों के बाद भी लोगों में अमावस के काजल का क्रेज उतना ही है, जितनी पुरानी यह परम्परा है।
महिलाओं की मानें तो कुम्हारों द्वारा बनाई गई कजराही घंटी में दीपावली के दिन मिट्टी के दिया में तेल के साथ रुई की बाती लगाकर उसे जलाने के बाद निकलने वाले धुएं को कजराही घंटी में रात भर रोककर उसी धुंए के गर्द को तेल में मिलाकर परिवार के सभी सदस्यों की आंखों में प्रसाद की तरह लगाया जाता है।
पूजन की तैयारियों को लेकर बाजारों में भीड़
दीपावली पर भगवान गणपति व माता लक्ष्मी के पूजन की तैयारियों को लेकर बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। घर-घर लोग त्योहार मनाने की तैयारियों में जुट गए हैं। घरों की साफ सफाई के साथ खरीददारी तेज हो गई है।
