सावधान! शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें महिलाएं, हो सकती हैं इस जानलेवा बीमारी का शिकार
केजीएमयू के गायनी आंकोलॉजी विभाग की डॉ. निशा सिंह ने बताया कि 65% महिलाएं कैंसर की गंभीर अवस्था में अस्पताल आती हैं, खासकर सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर म ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
65% महिलाएं कैंसर की गंभीर या अंतिम अवस्था में आती हैं।
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के कुल कैंसर का 22.86% हिस्सा है।
नियमित स्क्रीनिंग से कैंसर का सफल इलाज 70-90% संभव।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के गायनी आंकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. निशा सिंह ने कैंसर पीड़ित 65 प्रतिशत महिलाएं बीमारी की गंभीर या अंतिम अवस्था में अस्पताल आ रही हैं। इसमें सर्वाइकल व ओवेरियन कैंसर शामिल हैं। इस तरह के कैंसर से पीड़ितों में लक्षण देरी से नजर आते हैं।
महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करती हैं, जिससे स्थिति गंभीर बन जाती है। महिलाएं शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें। वह शनिवार को गायनी आंकोलाजी विभाग के प्रथम स्थापना दिवस समारोह में बोल रही थीं।
केजीएमयू के ब्राउन हाल में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. निशा सिंह ने कहा कि महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर होता है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरे स्थान पर है, जो कि महिलाओं के कुल कैंसर का लगभग 22.86 प्रतिशत हिस्सा है।
सर्वाइकल कैंसर के नए मामले और इससे होने वाली मौतें भी बड़ी संख्या में दर्ज होती हैं। यूपी में कैंसर स्क्रीनिंग बेहद कम है। 30 से 49 आयु वर्ग की सिर्फ 1.5 प्रतिशत महिलाएं ही सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग करा रही हैं। स्तन कैंसर स्क्रीनिंग की दर लगभग 0.4 प्रतिशत है। लखनऊ समेत आसपास के क्षेत्रों में स्तन व सर्वाइकल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं।
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डॉ. निशा सिंह ने कहा कि देर से इलाज शुरू होने के कारण न सिर्फ इलाज मुश्किल हो रहा है, बल्कि मरीजों की जान पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।
कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि देरी से इलाज का सबसे बड़ा कारण जागरुकता की कमी है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाएं नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करा पातीं। सामाजिक संकोच, आर्थिक परेशानी और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते महिलाएं अपनी सेहत को पीछे रख देती हैं।
कई मामलों में महिलाओं को यह तक जानकारी नहीं होती कि शुरुआती स्तर पर कैंसर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। सफदरजंग हॉस्पिटल की डॉ. शालिनी राजाराम ने कहा कि यदि कैंसर की पहचान पहले या दूसरे चरण में हो जाए तो इलाज की सफलता दर 70 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। इसके लिए नियमित स्क्रीनिंग, मैमोग्राफी और सर्वाइकल जांच बेहद जरूरी है।