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    गंगा एक्सप्रेसवे से सालाना होगी 30 हजार करोड़ रुपये की बचत, घटेगा माल ढुलाई का समय

    Updated: Sun, 24 May 2026 11:35 PM (IST)

    गंगा एक्सप्रेसवे से उत्तर प्रदेश में माल ढुलाई का समय और लागत काफी कम होगी, जिससे सालाना 25-30 हजार करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है। यह एक्सप्रेसवे रा ...और पढ़ें

    गंगा एक्सप्रेसवे से सालाना होगी 30 हजार करोड़ रुपये की बचत।

    गंगा एक्सप्रेसवे से सालाना होगी 30 हजार करोड़ रुपये की बचत।

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से उत्तर प्रदेश में माल ढुलाई का समय काफी कम होने की उम्मीद है। सरकार और उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार इससे हर वर्ष 25 से 30 हजार करोड़ रुपये तक की लाजिस्टिक्स की बचत हो सकती है। इसके साथ ही एक दर्जन से अधिक जिलों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

    छह लेन वाला यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। यह 12 जिलों से होकर गुजरता है और पश्चिमी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच एक बड़े लाजिस्टिक्स एवं औद्योगिक कारिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    औद्योगिक आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में हर वर्ष करीब 245 से 260 मिलियन टन आंतरिक माल ढुलाई होती है, जिसमें खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और खुदरा सामान प्रमुख हैं। वहीं राज्य से बाहर भेजे जाने वाले माल की मात्रा 135 से 150 मिलियन टन के बीच आंकी गई है।

    औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे राज्य की अर्थव्यवस्था में “नया अध्याय” साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे औद्योगिक विकास, लाजिस्टिक्स, कृषि, पर्यटन और रोजगार सृजन को तेजी मिलेगी।

    उन्होंने कहा, “यह सिर्फ सड़क परियोजना नहीं बल्कि एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग और लाजिस्टिक्स कारिडोर है। तेज माल परिवहन और कम ट्रांसपोर्ट लागत से हर साल 25 से 30 हजार करोड़ रुपये की बचत संभव है।”

    मंत्री के अनुसार, एक्सप्रेसवे कारिडोर के किनारे अब तक 46,660 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इसके तहत 6,507 एकड़ में 12 औद्योगिक नोड विकसित किए जा रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, फार्मा, इलेक्ट्रानिक्स, वेयरहाउसिंग और ई-कामर्स जैसे क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

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    ब्लू डार्ट के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी दीपांजन बनर्जी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में लाजिस्टिक्स संचालन की तस्वीर बदल देगा। उन्होंने कहा कि अब तक एनसीआर से पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला निर्बाध कारिडोर नहीं था, जिसे यह एक्सप्रेसवे पूरा करेगा।

    ट्राइटन लाजिस्टिक्स एंड मैरीटाइम के सीईओ जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि इससे सप्लाई चेन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और एयर कार्गो तथा फ्रेट कारिडोर से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

    यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है। मंत्री नंदी के मुताबिक भविष्य में इस एक्सप्रेसवे को उत्तराखंड से जोड़ने की भी योजना है।

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