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PGI लखनऊ ने किया कमाल, देश में पहली बार छोटे बच्चों की रोबोटिक लिवर सर्जरी

Published: Fri, 09 Oct 2026 07:26 AM (IST)

संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ ने 6 किलोग्राम से कम वजन वाले दो शिशुओं पर सफलतापूर्वक रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सर्जरी करके ...और पढ़ें

एसजीपीजीआइ के पीडियाट्रिक सर्जर्किल विभाग ने रचा इतिहास। जागरण

एसजीपीजीआइ के पीडियाट्रिक सर्जर्किल विभाग ने रचा इतिहास। जागरण

HighLights

  1. 6 किलोग्राम से कम वजन वाले शिशुओं की रोबोटिक लिवर सर्जरी।

  2. देश में पहली बार इतनी कम उम्र के बच्चों पर सफल ऑपरेशन।

  3. संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ ने रचा चिकित्सा इतिहास।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। संजय गांधी पीजीआइ के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशलियटी विभाग ने पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी में इतिहास रच दिया है। विभाग ने छह किलोग्राम से कम वजन वाले दो शिशुओं में रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सफलतापूर्वक कर दोनों बच्चों को जीवनदान दिया है। देश में पहली बार इतनी कम उम्र व वजन के बच्चों की रोबोटिक लिवर सर्जरी की गई है।

संस्थान प्रशासन के अनुसार, रायबरेली निवासी पहला बच्चा सात माह का बच्चा है, जिसका वजन पांच किलोग्राम है। उसके लिवर के बाएं हिस्से में हेपेटोब्लास्टोमा था। पिछले माह पांच सितंबर को कीमोथेरेपी के बाद उसकी रोबोटिक लेफ्ट लेटरल सेक्शनेक्टामी की गई। दूसरा मामला मथुरा की सात माह की बच्ची का है, जिसका वजन लगभग छह किलोग्राम है। इस बच्ची को भी लेफ्ट लोब में ट्यूमर था।

तीन अक्टूबर को रोबोटिक लेफ्ट हेपेटेक्टामी की गई। विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार, प्रो. विजय उपाध्याय और प्रो. अंकुर मंडेलिया ने प्रेसवार्ता में बताया कि अधिक उम्र और वजन के बच्चों में ऐसी सर्जरी पहले भी की गई हैं, लेकिन इतनी कम उम्र और वजन में यह पहला मामला है।

चुनौतीपूर्ण थी लिवर रिसेक्शन प्रक्रिया
प्रो. कुमार ने बताया कि शिशुओं में लिवर रिसेक्शन सबसे मुश्किल प्रक्रिया है। पेट में जगह कम, नाजुक बनावट, पतली रक्त वाहिकाएं और पित्त नलिकाएं बड़ी चुनौती हैं। इस उम्र में कुल रक्त लगभग 500 मिली होता है, ऐसे में रक्तस्राव जानलेवा हो सकता है। रोबोटिक तकनीक से रक्तस्राव की आशंका बेहद कम रही और दोनों बच्चों में खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी।

प्रो. विजय उपाध्याय ने बताया कि बच्चों में लिवर कैंसर 10 लाख में से एक में होता है। सही सर्जरी और इलाज से दोबारा होने की आशंका बहुत कम रहती है। दोनों बच्चों को पहले कीमोथेरेपी देकर ट्यूमर के आकार को कम किया गया, फिर सर्जरी की योजना बनाई गई। अब छह साइकिल कीमोथेरेपी पूरी की जाएगी। दोनों की रिकवरी काफी अच्छी है।

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सर्जरी करने वाली टीम में डा. अंजू, डा. तरुण, डा. रोहित, एनेस्थीसिया से डा. अरमानजीत सिंह, डा. कोमल पासवान, डा. अंशिता और नर्सिंग आफिसर रीता आर्य शामिल रहे। निदेशक प्रो. आरके धीमान ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। इस तरह की उपलब्धि सिर्फ संस्थान ही नहीं, प्रदेश के लिए भी अहम है।

बच्चों के पेट में महसूस हो गांठ तो तुरंत लें सलाह
प्रो. बसंत कुमार ने कहा, बच्चों में लिवर कैंसर में पेट के दाएं हिस्से में कड़ी गांठ, पेट फूलना, वजन न बढ़ना, भूख कम लगना, उल्टी, पीलिया और थकान दिखती है। इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ डाक्टर की सलाह जरूर लें।

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