कानपुर कोर्ट में नहीं टिकी 23 साल पुरानी वेश्यावृत्ति की पुलिसिया कहानी, दो महिलाओं समेत सात आरोपित दोषमुक्त करार
कानपुर की एक अदालत ने 23 साल पुराने अनैतिक देह व्यापार के मामले में दो महिलाओं सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों को कमजोर पाया और कहा कि घटनाक्रम प्रत्यक्ष नहीं था।

कोर्ट में नहीं टिकी 23 साल पुरानी वेश्यावृत्ति की पुलिसिया कहानी।
HighLights
23 साल पुराने देह व्यापार मामले में सात बरी।
कोर्ट ने पुलिस के सबूतों को कमजोर पाया।
पड़ोसियों या प्रत्यक्षदर्शी का कोई बयान नहीं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। 23 साल पुरानी अनैतिक देह व्यापार की पुलिसिया कहानी कोर्ट में नहीं टिक सकी। शहर का चर्चित सेक्स रैकेट का मुकदमा कोर्ट में नहीं ठहर सका। अपर जिला जज 15 मुकेश कुमार सिंह की कोर्ट ने दो महिलाओं समेत सात लोगों दोषमुक्त करार दिया।
कोर्ट ने फैसले में कहा कि किसी भी पड़ोसी या अन्य व्यक्ति ने घर में वेश्यालय चलने की शिकायत नहीं की थी। दोनों घरों में अनैतिक देह व्यापार से संबंधित घटनाक्रम प्रत्यक्ष नहीं पाया गया।
छापे के समय सभी अभियुक्त सामान्य अवस्था में थे। घटना के चार दिन बाद विवेचक ने तीन घरों से बरामदगी दिखाई। किसी भी जनसाक्षी ने घटना का समर्थन नहीं किया है।
फजलगंज थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक 28 नवंबर 2003 को बाबूपुरवा क्षेत्राधिकारी व एसओजी पर्यवेक्षण अधिकारी शैलेश कुमार यादव कई थानों के पुलिस के साथ अभियुक्तों की तलाश में फजलगंज चौराहा पहुंचे।
वहां सूचना मिली कि एक अपार्टमेंट में रहने वाली महिला के घर गिरोहबंदी कर अनुचित व अनैतिक कार्य करते हुए जिस्मफरोशी का धंधा चलता है। पुलिस ने छापा मारकर पांच युवतियों और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया।
एक युवती ने बताया कि वह बर्रा चार निवासी महिला के घर धंधा करने जाती है। इसके बाद पुलिस ने उस घर में छापा मारा। यहां से एक महिला, उसके दो बेटे, चालक समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया। 11 अभियुक्तों पर आरोप तय हुए थे। छह अभियुक्तों की फाइल अलग कर दी गई थी। अभियोजन की तरफ से आठ गवाह पेश किए गए।
कोर्ट ने गुरुवार को सात लोगों को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने कहा कि एक युवती के बयान के आधार पर दूसरी महिला के घर छापा मारा गया था। पुलिस अभिरक्षा में दिए गए बयान का कोई विधिक महत्व नहीं होता है।
जिन दो महिलाओं को धंधा करने वाली बताया था कि उनके शेष अभियुक्तों के संबंध जानने के लिए दोनों के घरों पर लगे टेलीफोन के कॉल डिटेल नहीं निकलवाए।
कॉल डिटेल न निकलवाने के बारे में विवेचक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसी मामले में एक अभियुक्त को पहले ही दोषमुक्त करार किया जा चुका है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय झा ने कहा कि फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।
जिरह के दौरान पुलिस के बयानों को अहम माना गया है। कहा गया कि घर के अंदर झांक कर देखा ड्राइंग रूम में बैठे लोग आपत्तिजनक स्थिति में नहीं थे। दोनों जगहों पर जो भी लोग मिले वह अश्लील हरकतें नहीं कर रहे थे।
किसी को भी पैसे लेते अथवा देते नहीं नहीं देखा और न ही पैसा बरामद हुआ। आरोपितों की जामा तलाशी में कोई भी आपत्तिजनक वस्तु प्राप्त नहीं हुई। पहले पुलिस ने कहा था कि शारीरिक संबंध बनाने की बात सुनी थी लेकिन जिरह में इंकार कर दिया।
कई पुलिस अफसरों ने नाम भी सामने आए थे
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अहमद अली ने बताया कि लड़कियों ने बयान में कई पुलिस अफसरों के नाम लिए थे। इसमें एक चर्चित इंसपेक्टर, उनके अधिवक्ता भाई, सीओ और एसपी शामिल थे।
