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    कसमंडी ढांचे को लेकर विवाद कायम, एक्सपर्ट बोले- मंदिर है या मकबरा; खोदाई के बाद ही चलेगा पता

    Updated: Sat, 30 May 2026 10:31 PM (IST)

    मलिहाबाद के कसमंडी कला में विवादित ढांचे को लेकर विवाद बरकरार है, विशेषज्ञ इसे मंदिर या मकबरा तय करने के लिए खोदाई या डेटिंग को अनिवार्य बताते हैं, क् ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। मलिहाबाद के कसमंडी कला में बकरीद का दिन सकुशल गुजर जाने के बाद भी विवादित ढांचे को लेकर विवाद बना हुआ है। दोनों ही पक्ष अपने दावों पर कायम हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि विवादित ढांचे की खोदाई या डेटिंग के बिना मंदिर है या मकबरा किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।

    किसी पुरातात्विक स्थल को केवल देखकर या उसकी तस्वीरें देखकर उसकी उम्र, पहचान आदि का आकलन नहीं कर सकते। इसके लिए सर्वे करना चाहिए। इस बीच अपर मुख्य सचिव पयर्टन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने भी ढांचों की किसी तरह की जांच रिपोर्ट से इन्कार किया है। निदेशक रेनू द्विवेदी का भी कहना है कि पुरातत्व निदेशालय की कोई टीम वहां नहीं गई थी।

    संस्कृति एवं पर्यटन विभाग को नहीं दी कोई रिपोर्ट

    इस संबंध में संस्कृति एवं पर्यटन विभाग को कोई रिपोर्ट भी नहीं दी गई है। फिलहाल वहां किसी तरह की जांच नहीं की गई। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सिद्धार्थ राय के अनुसार किसी पुरातात्विक स्थल की एक घंटे या एक दिन की जांच रिपोर्ट में कुछ नहीं स्पष्ट हो सकता। इसके लिए उस स्थल के हर जगह का मेजरमेंट (माप) किया जाए।

    फिर आकलन किया जाए कि ये कोई साइट है या पुराना बना हुआ स्थल? अगर पुरानी साइट है तो जाहिर सी बात है उसके नीचे अवशेष मिलेंगे। किसी स्थल के नीचे क्या है, इसे पता करने के दो तरीके हैं। पहला- वहां नियोजित तरीके से खोदाई करें। दूसरा- ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से पता लगाएं। इससे जमीन के नीचे छिपी हुई वस्तुओं, संरचनाओं और परतों का बिना खोदाई किए पता लगाया जा सकता है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (रेडियो) तरंगों का उपयोग करके जमीन के अंदर का थ्रीडी स्कैन या चित्र तैयार करता है।

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    जमीन के नीचे 10 मीटर तक किया जा सकता है पता

    जीपीआर प्रक्रिया के तहत जमीन के नीचे 10 मीटर तक पता किया जा सकता है। इससे उस स्थल या इमारत की उम्र का सटीक आकलन नहीं होगा, लेकिन मोटा-मोटा अनुमान लग जाएगा। इसके अलावा किसी विवाद के समाधान के लिए यदि आवश्यक हो तो डेटिंग कर सकते हैं।

    थर्मोल्यूमिनेसेंस (टीएल) डेटिंग से किसी प्राचीन कलाकृतियों, मिट्टी के बर्तनों (टेराकोटा) और ईंटों की आयु (निर्माण का समय) का पता लगाया जा सकता है। कार्बन डेटिंग से भी किसी निर्माण की आयु का सटीक पता लगाया जा सकता है। हालांकि कार्बन डेटिंग तभी की जाती है, जब किसी वस्तु में कार्बन हो। यह विधि केवल जैविक पदार्थों या ऐसी वस्तुओं पर काम करती है जो कभी जीवित थीं (जैसे पेड़-पौधे, लकड़ी, हड्डियां, बाल, चमड़ा या जीवाश्म)।

    जांच संग हो मौलाना की गिरफ्तारी

    लाखन आर्मी पासी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने पुरातत्व विभाग से स्थल की विधिवत जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ खबरें ऐसी आ रही हैं कि पुरातत्व विभाग ने जांच में इसे मस्जिद और मकबरा दर्शाया है, यह भ्रामक है। विभाग ने ऐसी किसी जांच नहीं कराई है। उन्होंने कहा कि इस स्थल पर खोदाई कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकेगी। ढांचों में धार्मिक गतिविधि चलाने वाले मौलाना की गिरफ्तारी भी की जाए।