कौशल किशोर के बदले तेवर: भाजपा नेताओं पर साधा निशाना, बोले- उसूलों पर न चलने वाले खत्म
पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बदले सुर भाजपा के कुछ नेताओं पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव ...और पढ़ें

अजय श्रीवास्तव, लखनऊ। लंबे समय से जमीनी राजनीति से जुड़े पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर के बदले सुर कई तरह के संकेत दे रहे हैं। खुद को भाजपा का कर्मठ कार्यकर्ता बताने वाले कौशल यह कहने में कोई गुरेज नहीं करते हैं कि लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के ही कुछ लोगों ने हरा दिया था। सपा उम्मीदवार को वोट डालने का माहौल बनाया गया।
कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में उन्हें सीतापुर सिधौली विधानसभा सीट से भी हार मिली। साढ़े पचपन हजार कम मत मिलना भितरघात था। इसकी शिकायत भी एक-एक नाम लेकर की गई है लेकिन ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई होना तो दूर की बात है, जबकि अपने ही संगठन के लिए ऐसा करने वालों को अच्छे पदों से नवाज दिया गया।
अब सोशल मीडिया में उनकी एक पोस्ट ने फिर से उन्हें चर्चा में ला दिया है। मंगलवार को उनकी एक पोस्ट सुर्खियों में आ गई। कौशल ने पोस्ट किया कि आज मेरी एक मित्र से बात हो रही थी तो उन्होंने कहा कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी, वह चली गई, अब नीचे आ रही है, नीचे की स्पीड भी बढ़ती जा रही है। गेंद को गिरने की स्पीड को कोई कम नहीं कर सकता है।
सोशल मीडिया पर उनके इस पोस्ट को लेकर प्रतिक्रिया भी आ रही है और लोग कह रहे हैं कि गेंद हल्की थी, तभी जल्द ही नीचे आ गई है।
इस पर कौशल किशोर से जागरण ने बातचीत की तो उनका कहना था कि उन्होंने यह पोस्ट भाजपा पर नहीं की है और भाजपा के खिलाफ कभी एक शब्द नहीं बोला हूं लेकिन जो उसूलों पर नहीं चलते हैं, वह खत्म हो जाते हैं, चाहे कोई संगठन हो या कोई व्यक्ति हो। कहा जैसे सिक्का जिस तेजी से ऊपर जाता है, उसे अधिक तेजी से नीचे आता है।
कौशल से पूछा? दल बदलने जा रहे हैं तो कहा, उनकी पत्नी भाजपा से विधायक हैं, वह खुद भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता हैं, जिस कार्यक्रम में बुलाया जाता है, वहां जाते हैं, जहां नहीं बुलाया जाता है तो वहां नहीं जाते हैं। भाजपा से उनका जुड़ाव है।
हालांकि, जानकार कहते हैं कि कौशल कभी खुलकर तो कभी बंद शब्दों से भाजपा के कुछ नेताओं पर निशाना साधते रहते हैं लेकिन इस समय उनके सुर बदले नजर आ रहे हैं।
कम्युनिस्ट विचारधारा छोड़ भाजपा से जुड़े थे
अगर कौशल किशोर की राजनीतिक शुरूआत को देखा जाए तो वह कम्युनिस्ट विचार धारा से जुड़े थे। इसके बाद उन्होंने खुद की राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी बना ली थी लेकिन 2002 में मलिहाबाद निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और विधायक बने 2002-2003 में वह मुलायम सिंह की सरकार में राज्य मंत्री श्रम भी बने लेकिन साढ़े तीन साल चली सरकार में वह आठ माह ही सरकार से अलग हो गए। पद से इस्तीफा दे दिया था।
कारण यह था कि वह श्रमिक थाना खोलने के पक्ष में थे और सीतापुर के महमूदाबाद के साथ ही लखनऊ में विधायक निवास दारुलशफा में श्रमिक थाना खोला था। वर्ष 2014 में वह भाजपा से जुड़ गए। मोहनलालगंज संसदीय सीट (सुरक्षित) से वह भाजपा के टिकट पर 16वीं लोकसभा के लिए मई 2014 और फिर 17वीं लोकसभा के लिए मई 2019 में निर्वाचित हुए थे।
सात जुलाई 2021 से 11 जून 2024 तक केंद्र सरकार में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। वह वे परख महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के एससी विंग के राज्य अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी जयदेवी भी मलिहाबाद विधानसभा सीट (सुरक्षित) से भाजपा की विधायक हैं, लेकिन लहर के बाद लोकसभा चुनाव में हार ने उन्हें झटका दे दिया था। पति सांसद और पत्नी विधायक होने को भाजपा के लोग पचा नहीं पा रहे थे।
तेरह सितंबर को दिखाएंगे अपनी शक्ति
तेरह सितंबर को प्रेरणा स्थल पर आत्मसम्मान समारोह में कौशल किशोर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। कहते हैं कि आजादी के लंबे समय बाद भी जिन लोगों को न्याय नहीं मिला, वह शामिल होंगे। गैरराजनीतिक कार्यक्रम में है और इसमें आम लोग ही जुटेंगे। सभी वर्ग के लोगों को बुलाया गया।
