KGMU लखनऊ में मृत मरीजों के नाम पर भी खरीदी गई थी दवाएं, अब दोषियों को बर्खास्त करने की तैयारी
केजीएमयू लखनऊ में असाध्य योजना के तहत महंगी दवाओं की खरीद में 2.25 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली सामने आई है। मृत मरीजों के नाम पर भी दवाएं खरीदी गईं; ...और पढ़ें

मर चुके रोगियों के नाम पर भी खरीदी गईं थी दवाएं।
HighLights
केजीएमयू में 2.25 करोड़ रुपये से अधिक की दवा धांधली।
मृत मरीजों के नाम पर खरीदी गईं महंगी दवाएं।
चीफ फार्मासिस्ट, डॉक्टर पर कार्रवाई की तैयारी।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के यूरोलाजी विभाग में असाध्य योजना के तहत मिलने वाली महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच पूरी हो गई है। रिपोर्ट में कई चौकाने वाली बातें सामने आई हैं। ऐसे मरीज, जिनकी पहले मौत हो चुकी है, उनके नाम पर भी महंगी दवाएं खरीदी जा रही थीं।
जांच कमेटी को करीब सवा दो करोड़ रुपये की दवाओं की गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं, जिसमें चीफ फार्मासिस्ट समेत विभाग के एक डॉक्टर की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
संस्थान के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी ने सोमवार शाम को जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंप दी। केजीएमयू प्रशासन मंगलवार को दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ बर्खास्तगी की भी तैयारी में है।
माह में आठ-10 लाख से 35 लाख पहुंचा बजट तो शक गहराया
सूत्रों के अनुसार, जांच कमेटी विभाग की ओर से मुहैया कराए गए असाध्य रोगियों की सूची में तीन ऐसे रोगियों के नाम हैं, जिनकी कुछ माह पहले मौत हो चुकी है। कमेटी ने फोन नंबर पर संपर्क किया तो परिवारजन ने बताया कि मरीज करीब चार माह पहले दम तोड़ चुका है।
यही नहीं, करीब सात-आठ ऐसे रोगियों के नाम सूची में हैं, जिन्हें कैंसर कभी हुआ ही नहीं और उनके नाम पर कैंसर की दवाएं खरीदी जा रही थीं। दरअसल, यूरोलाजी विभाग में सात माह पहले तक असाध्य रोगियों की दवाओं की खपत आठ से 10 लाख रुपये प्रतिमाह थी, जो जनवरी से मार्च तक अचानक बढ़कर करीब 35 लाख रुपये प्रतिमाह हो गई। इस पर अधिकारियों को शक हुआ।
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कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने विभाग में असाध्य रोगियों की दवाओं पर खर्च का पूरा ब्योरा तलब किया और सभी बिल और ओपीडी कार्ड का आडिट कराया गया, जिसमें कई अनियमताएं मिलीं। इसके बाद उन्होंने मामले की गोपनीय जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की, जिसे सवा दो करोड़ रुपये से अधिक की धांधली के साक्ष्य मिले हैं।
छह माह में एक बार लगने वाले इंजेक्शन को चार बार दिखाया
जांच रिपोर्ट में में यह तथ्य भी सामने आया है कि कैंसर मरीजों को भर्ती कर दवा देने के नियम का उल्लंघन भी किया गया। कई रोगियों के नाम पर कागजों में ताकत बढ़ाने और प्रोटीन के इंजेक्शन एक महीने में पांच-छह बार लगाए गए, जबकि कैंसर रोग विशेषज्ञों का दावा है कि ऐसे इंजेक्शन छह महीने में एक या दो बार ही लगते हैं।
यह कोई सस्ते इंजेक्शन नहीं हैं, बल्कि इनकी की कीमत आठ से 10 हजार रुपये है। सवाल है कि यह खेल महीनों तक चलता रहा, लेकिन केजीएमयू प्रशासन को भनक तक नहीं लगी।
अचानक दवाओं की खपत तीन गुणा से अधिक बढ़ने पर शक हुआ तो इसकी जानकारी कुलपति को दी गई। शुरुआत में कुछ बिल और मरीजों के कार्ड का ऑडिट कराया तो कई अनियमतताएं मिलीं। उन्होंने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की। जांच कमेटी ने सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की है। लगभग सवा दो करोड़ रुपये की धांधली के साक्ष्य मिले हैं। आरोपित संविदा कर्मियों को विभागाध्यक्ष के कार्यालय से संबद्ध करने के साथ संबंधित एजेंसी को भी नोटिस जारी किया गया है। मंगलवार को एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। -प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू।