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लखनऊ: जन्म से नहीं था गुदाद्वार, 6 और 7 माह की दो बच्चियों को सर्जरी से मिला नया जीवन

Updated: Thu, 27 Aug 2026 11:23 AM (GMT+05:30)

सीतापुर की दो बच्चियों को बलरामपुर अस्पताल में जटिल सर्जरी के बाद नया जीवन मिला, जो जन्म से गुदाद्वार विहीन थीं।

बलरामपुर अस्पताल।

बलरामपुर अस्पताल।

HighLights

  1. सीतापुर की दो बच्चियों का बलरामपुर अस्पताल में सफल ऑपरेशन।

  2. जन्म से गुदाद्वार न होने की जटिल समस्या का हुआ समाधान।

  3. डॉ. अखिलेश कुमार की टीम ने दी बच्चियों को नई जिंदगी।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। सीतापुर निवासी दो बच्चियों के जन्म के समय से ही गुदाद्वार नहीं थे, जिस कारण वे असहनीय पीड़ा से गुजर रही थीं। छह व सात माह तक दोनों योनि मार्ग से ही मल त्याग कर रही थीं। ऐसे में बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सक ने जटिल शल्य चिकित्सा से उन्हें नया जीवन दिया।

वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार ने परीक्षण और जांच के बाद दोनों बच्चियों की शल्य चिकित्सा का निर्णय लिया। दोनों बच्चियों की सर्जरी 19 व 21 अगस्त को की गई। प्रत्येक सर्जरी में लगभग तीन घंटे का समय लगा। जटिल शल्य प्रक्रिया के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक संरचना के अनुरूप उचित स्थान पर नया गुदा द्वार बनाया गया।

सर्जरी के बाद दोनों बच्चियों को पीडियाट्रिक वार्ड-तीन में स्थानांतरित किया गया है। दोनों अब सामान्य रूप से मां का दूध ले रही हैं तथा उनके सभी महत्वपूर्ण जीवन संकेतक सामान्य हैं।

उनकी स्थिति में भी सुधार हो रहा है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि बलरामपुर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा जटिल मामलों का सफल उपचार किया जा रहा है। उनकी वर्तमान स्थिति संतोषजनक है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

सर्जरी करने वाली टीम

इस सर्जरी में डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. एसए मिर्जा एवं एनेस्थीसिया टीम, निर्मला मिश्रा (सिस्टर इंचार्ज), उर्मिला सिंह, सीमा शुक्ला, अंजना सिंह, कृष्ण तथा ओटी असिस्टेंट राजू का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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