इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ: मृत्यु के बाद भी गरिमा का अधिकार, पिपरा घाट की हो मरम्मत
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पिपरा घाट श्मशान भूमि की तत्काल मरम्मत का आदेश दिया है, यह कहते ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ। जागरण
HighLights
पिपरा घाट श्मशान भूमि की तत्काल मरम्मत का हाई कोर्ट आदेश।
मृत्यु के बाद भी मानवीय गरिमा का अधिकार, अनुच्छेद 21 के तहत।
आधुनिक शवदाह गृह के लिए चार सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया।
विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी के कैंट क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक पिपरा घाट श्मशान भूमि की चारदीवारी और अन्य जर्जर ढांचों की तत्काल मरम्मत का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला मानवीय गरिमा का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी बना रहता है।
प्रत्येक मृत व्यक्ति को उसके दाह-संस्कार के दौरान समुचित सम्मान और गरिमा प्रदान की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभिषेक कुमार चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता शिव गुप्ता द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष पिपरा घाट शमशान भूमि की दयनीय स्थिति की तस्वीरें और साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
याचिका में कहा गया था कि लखनऊ के प्रमुख शवदाह गृहों में एक होने के बावजूद पिपरा घाट लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। श्मशान घाट की चहारदीवारी कई जगहों से ढह चुकी है, जिसके कारण रात के समय वहां असामाजिक तत्वों का डेरा रहता है और बंदर, कुत्ते, गाय जैसे बेसहारा पशु परिसर में प्रवेश कर गंदगी फैलाते हैं। कई बार अंतिम संस्कार के बाद शेष मानव अवशेष भी पशुओं द्वारा बिखेर दिए जाते हैं, जिससे मृतकों की गरिमा प्रभावित होती है।
दाह-संस्कार के लिए बने शेड पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार रुक जाता है। शोक संतप्त परिवारजन के बैठने के लिए कोई उचित शेड या स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। यह क्षेत्र कैंटोनमेंट (छावनी) बोर्ड और नगर निगम की सीमाओं के समन्वय में आता है।
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सुनवाई के दौरान छावनी बोर्ड की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आधुनिक शवदाह गृह के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस पर कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर टेंडर जारी करने की कार्यवाही पूरी की जाए। शवदाह स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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