लखनऊ जंक्शन पर बड़ा हादसा: स्टेशन के एक हिस्से की छत भरभराकर गिरी, बाल-बाल बचे यात्री
लखनऊ जंक्शन पर बिना अनुमति कैंटीन की दीवार तोड़ने के दौरान एक पिलर टूटने से महिला प्रतीक्षालय की छत गिर गई। इस घटना में यात्री बाल-बाल बचे।
HighLights
लखनऊ जंक्शन पर महिला प्रतीक्षालय की छत गिरी।
बिना अनुमति कैंटीन की दीवार तोड़ने से हुआ हादसा।
यात्री बाल-बाल बचे, तीनों प्रतीक्षालय बंद किए गए।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। बिना अनुमति के लखनऊ जंक्शन की बंद पड़ी कैंटीन की दीवार को तोड़ने के दौरान एक पिलर टूट गया। इस कारण लखनऊ जंक्शन के महिला प्रतीक्षालय के हिस्से को लेते हुए छत का एक बड़ा हिस्सा गिर गया। छत जिस स्थान पर गिरी, उसके ठीक बगल के वेटिंग रूम में 90, और ऊपर लगभग 110 यात्री बैठे थे।
कार्यस्थल से कुछ देर पहले ही 10 श्रमिक वहां से दूसरी जगह गए थे। इस मामले को लेकर रेलवे लीपापोती करता रहा। वह अपने को बचाने के लिए गेंद रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) और आईआरसीटीसी के पाले में डालता रहा। देर शाम तक कोई भी वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर ही नहीं पहुंचा।
वहीं, सुरक्षा को देखते हुए तीनों प्रतीक्षालयों से यात्रियों को निकालकर उसे बंद कर दिया गया है। अब यात्रियों के बैठने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। घटना शाम करीब चार बजे की है। लखनऊ जंक्शन में प्रवेश करते ही बायीं ओर आईआरसीटीसी की रेल आहार कैंटीन चलती थी।
इस कैंटीन को बंद कर दिया गया था। आईआरसीटीसी ने कैंटीन को रेलवे को दो माह पहले ही सिपुर्द कर दिया था। कैंटीन के ठीक बगल में यात्री प्रतीक्षालय है जहां यात्रियों का सामान रखने के लिए एक लाकर रूम भी है। इसी हिस्से को विस्तार देने के लिए बंद पड़ी 40 गुणे 40 फीट की कैंटीन के पिछले हिस्से की दीवार तोड़ने का काम पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने ठेकेदार को दिया था।
ठेकेदार ने 10 श्रमिक को लगाकर दीवार को तोड़ने का काम शुरू किया। बिना सुरक्षा उपाय के दीवार तोड़ते ही एक पिलर टूट गया। पिलर पर ऊपर बने महिला प्रतीक्षालय का भार था। पिलर टूटते ही महिला प्रतीक्षालय के शौचालय वाले हिस्से के साथ करीब 40 गुणे 40 फीट की छत गिर गई।
छत गिरते ही तेज धमक से यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। उसका मलबा पूरे परिसर में फैल गया। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए घटनास्थल की बैरिकेडिंग कर दी गई। उसके बगल वाले यात्री प्रतीक्षालय और प्रथम तल पर स्थित महिला व पुरुष एसी यात्री प्रतीक्षालय से करीब 200 यात्रियों को हटाया गया। तीनों ही प्रतीक्षालयों को बंद कर दिया गया है।
बिना अनुमति हो रहा था काम
जिस हिस्से की दीवार को तोड़ा गया, उसका काम ठेकेदार ने बिना स्टेशन प्रशासन की अनुमति के ही शुरू किया था। यह काम इंजीनियरिंग और वाणिज्य अनुभाग के बीच बिना अनुमति के हो रहा था। इस कारण ही देर शाम तक उनकी ओर से आरपीएफ में कोई लिखित सूचना तक नहीं दी गई।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता ने कहा कि काम आईआरसीटीसी करा रहा था। आईआरसीटीसी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि दो महीने पहले ही बंद कैंटीन रेलवे को वापस सौंप दी गई थी। उनकी ओर से कोई काम नहीं हो रहा था।
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