लखनऊ के कसमंडी कला में मंदिर-मकबरा विवाद गहराया, नमाज के बाद बढ़ा तनाव
लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला गांव में मंदिर-मकबरा विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर पासी समाज ने विर ...और पढ़ें

लखनऊ में कसमंडी कला स्थित विवादित स्थल। जागरण
HighLights
कसमंडी कला में मंदिर-मकबरा विवाद गहराया।
नमाज के लिए 200 लोग पहुंचे, पासी समाज का विरोध।
पुलिस बल तैनात, लाखन आर्मी अध्यक्ष सूरज पासी नजरबंद।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ स्थित मलिहाबाद के कसमंडी कला गांव में एक पुराने ढांचे को लेकर दो समुदायों में विवाद गहराता जा रहा है। विवादित स्थल मंदिर है या मकबरा इस पर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन शुक्रवार को उस समय विवाद बढ़ गया जब पुलिस की मौजूदगी के बीच बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने पहुंच गए।
विवादित स्थल पर सामान्य दिनों में औसतन 10-15 लोग नमाज पढ़ने आते थे, लेकिन शुक्रवार को करीब 200 लोग पहुंचे। नमाज पढ़े जाने का विरोध करते हुए पासी समाज के लोग भी एकत्र हो गए और नारेबाजी शुरू हो गई। कानून-व्यवस्था की बिगड़ने की आशंका में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी सहित कई लोगों को घरों में नजरबंद कर दिया है। डीएम विशाख जी ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को चौबीस घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। सूरज पासी का कहना है कि मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच और महाराजा कंसा पासी के किले के संरक्षण की मांग की जा चुकी है।
ऐसे में जांच पूरी होने तक नमाज की अनुमति देना गलत है। वहां पर पिछले तीन-चार साल में पक्की कब्रें बनाकर अतिक्रमण किया गया है। पासी समाज का दावा है कि यह जगह महाराज कंसा पासी का किला है, जहां शिव मंदिर में पूजा होती थी। जब तक पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट नहीं आती तब तक यहां किसी तरह की धार्मिक गतिविधि पर रोक लगे।
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वहीं, मुस्लिम पक्ष के जमाल मास्टर और लुकमान का कहना है कि यह सैकड़ों साल पुराना मकबरा है, जहां उनके पूर्वजों के समय से नमाज पढ़ी जाती रही है। यह धार्मिक स्थल लंबे समय से मुस्लिम समुदाय के उपयोग में रहा है, इसलिए किसी अन्य पक्ष का दावा उचित नहीं है।
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दरअसल, यह मामला कुछ समय पहले पूर्व डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा के एक बयान के बाद गरमाया था। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर की कसमंडी में आयोजित जनसभा में बतौर मुख्य अतिथि डा. शर्मा ने मंच से ही राजा कंसा पासी के इतिहास और उनके शौर्य का जिक्र किया था।
इसके बाद पासी समाज इस स्थान को लेकर सक्रिय हुआ। पासी समाज का दावा है कि दो पुराने ढांचे राजा कंसा के शिव मंदिर थे। बाद में उनको मकबरे में बदल दिया गया। ढांचे में नाग कलश की आकृति बनी है।
इतिहासकारों के अनुसार, 980-1031 ईस्वी के दौरान कसमंडी कंवलाहार में राजपासी राजा कंसा का शासन था। उसी दौर में सैयद सालार मसूद गाजी ने पंजाब और दिल्ली जीतते हुए अवध में प्रवेश किया। एसडीएम अंकित मौर्य ने कहा कि गांव में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। विवादित स्थल को लेकर कोई भी अंतिम निर्णय जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।