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लखनऊ में बदलते मौसम के बीच स्वाइन फ्लू का बढ़ा खतरा, 6 मरीजों की रिपोर्ट आई पॉजिटिव; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

Published: Thu, 03 Sep 2026 05:03 AM (IST)

लखनऊ में बदलते मौसम के बीच स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले बढ़ रहे हैं, बुधवार को 6 नए मरीज मिले, ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. लखनऊ में स्वाइन फ्लू के 6 नए मरीज मिले, चिंता बढ़ी।

  2. पिछले 33 दिनों में 27 स्वाइन फ्लू मामले, विभाग अलर्ट।

  3. बदलते मौसम में अस्पतालों को जांच के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में बदलते मौसम के बीच सर्दी-खांसी, बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ स्वाइन फ्लू (एच1एन1) ने भी स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित छह मरीजों की जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही राजधानी में पिछले 33 दिनों के दौरान स्वाइन फ्लू के 27 मरीज सामने आ चुके हैं। लगातार नए मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को सतर्क रहने और संदिग्ध मरीजों की समय से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

सीएमओ डा. एनबी सिंह के मुताबिक, सभी मरीजों की तबीयत स्थिर है। किसी को गंभीर लक्षण नहीं है। मौसम में बदलाव और बारिश के बाद उमस बढ़ने से वायरल संक्रमण के मामलों में भी इजाफा देखा जा रहा है। स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल या सर्दी-जुकाम से काफी मिलते-जुलते हैं। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

ऐसे में लगातार बने रहने वाले बुखार और खांसी को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। उन्होंने बताया कि सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में करीब चार गुना तक वृद्धि हुई है। इनमें बच्चों, बुजुर्गों और पहले से दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

अस्पतालों को निर्देश दिया है कि फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की स्थिति पर नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर जांच कराएं। सीएमओ का कहना है कि तेज बुखार के साथ सीने में दर्द, बेहोशी, रक्तचाप कम होना, सांस फूलना, नाखूनों का नीला पड़ना या बलगम में खून आने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर मरीज को गंभीर श्रेणी में रखते हुए रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच कराई जानी चाहिए।