आपदा प्रबंधन और हाईवे निर्माण में गेम चेंजर साबित होगा 'स्मार्ट ट्रैफिक मॉडल', लवि के विद्यार्थियों ने किया आविष्कार
लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने दो महत्वपूर्ण तकनीकी मॉडल विकसित किए हैं: एक स्मार्ट ट्रैफिक मॉडल जो आपदा प्रबंधन और ...और पढ़ें

HighLights
स्मार्ट ट्रैफिक मॉडल आपदा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा में सहायक।
प्लास्टिक कचरे से सस्ता कच्चा तेल बनाने वाला रिएक्टर।
दोनों नवाचार लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा विकसित।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के विद्यार्थियों ने दो ऐसे अनूठे और किफायती तकनीकी माडल विकसित किए हैं, जो आपदा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की दिशा में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। यह माडल हाईवे निर्माण में भी मददगार साबित होगा।
विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के विद्यार्थियों मुस्कान, गौरव, अमित और आयुष ने डा. मनोज कुमार जैन के निर्देशन में विशेष ट्रैफिक माडल तैयार किया है। यह माडल पहाड़ी रास्तों के अंधे मोड़ों, प्राकृतिक आपदाओं और हाईवे निर्माण के समय यातायात को सुरक्षित बनाएगा।
इंटरनेट ठप होने पर भी लंबी दूरी तक कर सकता है काम
इसमें आर्डयूनो नैनो और लांग रेंज (लोरा) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट ठप होने पर भी यह लंबी दूरी तक काम करता है। पूरी तरह सोलर पैनल से संचालित होने के कारण यह बिजली संकट वाले सुदूर क्षेत्रों में भी चालकों को दुर्घटनाओं के प्रति पहले ही सचेत कर देगा।
इस शोध परियोजना को हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कानपुर में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया। यह शोध पत्र प्रतिष्ठित कैंब्रिज स्कालर पब्लिकेशन में प्रकाशन के लिए प्रस्तावित है। इंजीनियरिंग संकाय के अधिष्ठाता (डीन) प्रो. सतेंद्र पाल सिंह ने कहा कि यह तकनीक न केवल आपदा के समय लोगों की जान बचाने में उपयोगी साबित होगी, बल्कि प्लास्टिक प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौती से निपटने में भी एक 'गेम-चेंजर' बनकर उभरेगी।
न्यूनतम लागत में प्लास्टिक से मिलेगा कच्चे तेल का विकल्प
विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों इरम जेया, वत्सल विश्वकर्मा, सुमित सिंह, प्रियांशु और गौरव रावत ने डा. प्रवीण कुमार राय के मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में न्यूनतम लागत में एक 'मिनी पायरोलिसिस रिएक्टर' का निर्माण किया है, जो प्लास्टिक कचरे से कच्चे तेल (क्रूड आयल) का विकल्प तैयार करता है। बाजार में इस तरह की मशीनों की कीमत कई लाख रुपये से अधिक होती है।
यह मशीन हाई डेंसिटी पालीइथिलीन व लो-डेंसिटी पालीइथिलीन कचरे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर, आक्सीजन की अनुपस्थिति में उसे 350 सेंटीग्रेट से 500 सेंटीग्रेट के तापमान पर गर्म करती है। इस प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली हाइड्रोकार्बन गैस कंडेनसर (संघनित्र) से होकर गुजरती है और तरल ईंधन में परिवर्तित हो जाती है।
