25 साल बाद संस्कृत शिक्षा को मिलेगा अपना भवन, लखनऊ में 42 करोड़ से तैयार होगा हाईटेक मॉडर्न कैंपस
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद को 25 साल के इंतजार के बाद लखनऊ के निशातगंज में अपना स्थायी भवन मिलेगा। लगभग 41-42 करोड़ रुपये की लागत से ब ...और पढ़ें

HighLights
25 साल बाद संस्कृत शिक्षा परिषद को मिला स्थायी भवन।
लखनऊ के निशातगंज में 42 करोड़ से बनेगा आधुनिक परिसर।
भवन में लैंग्वेज लैब, लाइब्रेरी, शोध सुविधाएं होंगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। करीब 25 साल के इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश की संस्कृत शिक्षा को आखिरकार अपना स्थायी ठिकाना मिलने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के निशातगंज में उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का भव्य और आधुनिक भवन बनाया जाएगा, जो न सिर्फ प्रशासनिक केंद्र बनेगा बल्कि संस्कृत के शोध और विस्तार का नया हब भी बनेगा।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का गठन 17 फरवरी 2001 को राज्य सरकार की अधिसूचना से किया गया था। परिषद प्रथमा (कक्षा 8) से उत्तर मध्यमा (कक्षा 12) तक की संस्कृत शिक्षा का संचालन, परीक्षा और प्रमाणपत्र जारी करती है। 2002 से यह जिम्मेदारी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से लेकर परिषद को दी गई थी। इसके गठन के बाद से ही परिषद को अपने स्वतंत्र भवन की जरूरत महसूस की जा रही थी। लंबे इंतजार के बाद अब यह सपना साकार होने जा रहा है।
पहले परिषद का भवन सिटी स्टेशन के पास प्रस्तावित था, लेकिन वहां लखनऊ मेट्रो की लाइन प्रस्तावित होने के कारण स्थान बदल दिया गया। अब राजकीय इंटर कालेज निशातगंज के पीछे करीब दो एकड़ जमीन पर यह भवन तैयार होगा। इस परियोजना पर लगभग 41 से 42 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत धनराशि वापस चली गई थी, लेकिन अब नए वित्तीय वर्ष में परियोजना को फिर से मंजूरी मिल गई है।
जल्द ही कार्यदायी संस्था तय की जाएगी और निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह भवन पारंपरिक नागर शैली में बनाया जाएगा, जिसमें आधुनिक सुविधाओं का समावेश होगा। परिसर में लाइब्रेरी, मीटिंग हाल और अत्याधुनिक लैंग्वेज लैब बनाई जाएगी। लैंग्वेज लैब में संस्कृत के साथ अन्य भाषाओं पर भी शोध की सुविधा मिलेगी, जिससे भाषा अध्ययन को नया आयाम मिलेगा।
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इस भवन के बनने से प्रदेश में संस्कृत शिक्षा, परीक्षाओं और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। छात्रों और शिक्षकों के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध होंगे। संस्कृत के शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही अन्य भाषाओं के साथ तुलनात्मक अध्ययन की सुविधा बढ़ेगी।