केजीएमयू में MBBS इंटर्न डॉक्टरों की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, चांसलर मेडल पाने वाली दीप्ति भी शामिल
Hunger Strike in KGMU: प्रमुख मांग है कि उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किया जाए।

एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड (भत्ता) बढ़ाने की मांग को लेकर दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी
HighLights
दीप्ति को एमबीबीएस में मिला है प्रतिष्ठित चांसलर मेडल
इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड 12,000 से 30,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग
डॉक्टरों का आरोप, आठ से 12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी मजदूरों से भी कम दिहाड़ी
जुलाई में आरएमएल मेडिकल इंस्टीट्यूट में भी हुई थी एसबीबीएम इंटर्न की हड़ताल
जागरण संवाददाता, लखनऊ। विश्वविख्यात चिकित्सा संस्थान किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड (भत्ता) बढ़ाने की मांग को लेकर दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहा। इनमें से आठ भूख हड़ताल पर भी बताए जा रहे हैं। मांग पूरी न होने पर उन्होंने प्रदेशव्यापी चिकित्सा सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में इंटर्न (प्रशिक्षु) डाक्टरों ने इंटर्न डाक्टरों को अभी 12 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है। वे इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग कर रहे हैं। मांग को लेकर आठ इंटर्न डाक्टर भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जबकि उनके कई सहपाठी धरना दे रहे हैं।
इंटर्न डाक्टरों का कहना है कि उन्हें मरीजों की देखभाल और चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाने पड़ते हैं। ऐसे में 12 हजार रुपये से उनका खर्च नहीं चल रहा है। उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों और देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की तुलना में कम है।
उन्हें एम्स व एसजीपीजीआइएमस जैसे संस्थानों में मिलने वाले स्टाइपेंड के अनुरूप भुगतान किया जाए। केजीएमयू में इससे पहले भी इंटर्न डाक्टरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी थी। अगस्त की शुरुआत में भी बड़ी संख्या में इंटर्न और छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रशिक्षुओं का कहना है कि समान जिम्मेदारियों के लिए स्टाइपेंड में बड़ा अंतर उचित नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि आठ से 12 घंटे ड्यूटी के बाद भी उन्हें करीब ₹400 प्रतिदिन मिलते हैं।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में शनिवार को दिन में एक बजे से बजे चार सौ से अधिक मेडिकल इंटर्न्स एवं छात्रों ने इंटर्नशिप स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरु किया। प्रदर्शन के दौरान वर्तमान ₹12,000 प्रति माह के इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह करने की मांग उठाई गई। इस प्रदर्शन का नेतृत्व प्रोफेसरों ने किया और केजीएमयू की कुलपति का भी समर्थन है। बड़ी संख्या में इंटर्न्स और छात्रों ने एकजुट होकर उचित एवं संशोधित स्टाइपेंड की अपनी मांग को मजबूती से उठाया।
प्रदर्शन करने वालों की प्रमुख मांग है कि उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किया जाए, ताकि इसे देशभर के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में दिए जा रहे इंटर्नशिप स्टाइपेंड के मानकों के करीब लाया जा सके।
छात्रों ने देशभर में इंटर्नशिप स्टाइपेंड में मौजूद असमानता पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न्स को मिलने वाला स्टाइपेंड देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है और यह भारत में सबसे कम स्टाइपेंड में से एक है। इंटर्न्स एवं छात्रों का कहना है कि इंटर्न्स के महत्वपूर्ण क्लिनिकल कार्य, लंबे कार्य घंटे और मरीजों के प्रति जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें उचित एवं सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
इंटर्न्स ने संबंधित अधिकारियों से ₹30,000 प्रति माह स्टाइपेंड करने की प्रक्रिया में तत्काल कदम उठाने की अपील की, ताकि अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों एवं राज्यों के साथ स्टाइपेंड में अधिक समानता स्थापित हो सके। कुलपति ने इंटर्न्स मांगों को महत्वपूर्ण एवं विचारणीय मानते हुए आश्वासन दिया कि वे इस विषय को मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगी।
