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'नए मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं क्यों नहीं?' नवजात की मौत पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Published: Thu, 10 Sep 2026 11:25 AM (IST)

सुलतानपुर में इलाज के अभाव में नवजात की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ।

HighLights

  1. सुलतानपुर में नवजात की मौत पर हाई कोर्ट ने सवाल उठाए।

  2. नए मेडिकल कॉलेजों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बेड की कमी पर चिंता।

  3. राज्य सरकार से अन्य मेडिकल कॉलेजों की सुविधाओं पर रिपोर्ट मांगी।

विधि संवाददाता, लखनऊ। सुलतानपुर में इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजे जाने के बीच नवजात की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कोर्ट ने पूछा है कि जब नए मेडिकल कॉलेजों में प्रसव कराए जा रहे हैं तो वहां आपात स्थिति से निपटने के लिए वेंटिलेटर, आक्सीजनयुक्त बेड और विशेषज्ञ चिकित्सक क्यों उपलब्ध नहीं हैं। पीठ ने राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा है कि प्रदेश में हाल में खोले गए अन्य मेडिकल कॉलेजों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की क्या स्थिति है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की पीठ ने आशुतोष कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, केजीएमयू के कुलपति, डा.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और एसजीपीजीआइ के निदेशक तथा सुलतानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से अगली सुनवाई में जुड़ने का निर्देश दिया है।याचिका के अनुसार, सुलतानपुर के राजकीय स्वायत्त मेडिकल कॉलेज में जन्म के बाद नवजात में जन्मजात जटिलताएं सामने आईं।

उसे तत्काल वेंटिलेटर और बाल शल्य चिकित्सक की जरूरत थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज में दोनों सुविधाएं नहीं थीं। करीब तीन वर्ष पहले शुरू हुए इस मेडिकल कॉलेज से बच्चे को लखनऊ स्थित केजीएमयू रेफर किया गया। वहां आक्सीजनयुक्त बेड उपलब्ध नहीं था।

इसके बाद डा.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान भेजा गया, लेकिन वहां भी बेड नहीं मिला। एसजीपीजीआइ में भी संबंधित विभाग में बेड उपलब्ध नहीं हो सका। इस भागदौड़ के बीच जन्म के 24 घंटे के भीतर नवजात की मौत हो गई।

कोर्ट ने कहा कि गंभीर जन्मजात जटिलताओं वाले नवजात को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा और जीवनरक्षक उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है।

यदि नए मेडिकल कॉलेजों में ये सुविधाएं नहीं होंगी तो मरीजों को लगातार रेफर करना पड़ेगा। पीठ ने सरकार से पूर्व के न्यायिक आदेशों के अनुरूप व्यवस्था लागू किए जाने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही यह बताने का निर्देश दिया है कि अन्य नए मेडिकल कॉलेजों में भी ऐसी कमियां तो नहीं हैं।

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