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PMO के लेटर पर भी ट्रस्ट ने नहीं दिया वित्तीय ब्योरा, चंपतराय ने जांच का हवाला देकर प्रशासन को जानकारी देने से किया इनकार

Published: Thu, 25 Jun 2026 05:30 AM (IST)

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पीएमओ के पत्र पर जिला प्रशासन को वित्तीय जानकारी देने से इनकार कर दिया है, एसआईटी जांच का हवाला दिया है।

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HighLights

  1. ट्रस्ट ने वित्तीय जानकारी देने से किया इनकार।

  2. एसआईटी जांच में चढ़ावा चोरी की बड़ी खामियां।

  3. नृपेंद्र मिश्र बन सकते हैं ट्रस्ट के नए सीईओ।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जिला प्रशासन को संदर्भित पत्र पर एसआइटी जांच का हवाला देते हुए वित्तीय जानकारी देने से इन्कार कर दिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को स्थानीय भाजपा नेता की ओर से लिखे गए पत्र पर जब जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी तो ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने जानकारी देने से ही इन्कार कर दिया। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आते ही भाजपा नेता डा. रजनीश सिंह ने नौ जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था।

उन्होंने मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। इसके बाद भी उन्होंने एक पत्र 12 जून को लिखा। बाद में 13 जून को एसआइटी गठित की गई। इस पर मंगलवार को पीएमओ ने इसे जिला प्रशासन को संदर्भित किया, लेकिन ट्रस्ट ने जानकारी नहीं दी।

एसआइटी ने प्रदेश सरकार को सौंपी थी रिपोर्ट 

मंगलवार को ही एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी थी, जो अब पीएमओ भेज दी गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पीएमओ को मिली शिकायत को जरूरी कार्रवाई के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को भेजा गया था। पेट्र के अनुसार 23 जून को एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे एक पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने शिकायत में मांगी गई जानकारी के लिए चंपतराय से संपर्क किया था।

राय ने उन्हें बताया कि अभी विशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच चल रही है और जांच पैनल सभी जरूरी रिकार्ड और जानकारी इकट्ठा कर रहा है। अभी मांगी गई जानकारी नहीं दी जा सकती। पीएमओ को भेजी गई इस शिकायत में कई जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इनमें 'समर्पण निधि' अभियान के जरिए इकट्ठा किए गए कोष, अलग-अलग तरीकों से मिले दान, सोना, चांदी और गहनों के रूप में मिले योगदान, बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन, जमीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन पर खर्च, और आडिट व निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं।

सूत्रों के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एसआइटी को हर कदम पर खामियां मिली हैं। न केवल ट्रस्टियों के स्तर से अनदेखी साबित हो रही है, बल्कि गणना की जिम्मेदारी संभाल रहे भारतीय स्टेट बैंक के कर्मियों की भी संलिप्तता या लापरवाही प्रमाणित हो रही है। इसके बावजूद अभी उन्हीं बैंककर्मियों से गणना कराई जा रही है, जिन पर सवाल उठे हैं।

स्टाफ न बदलने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं

एसबीआइ के स्टाफ न बदलने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। बैंक स्तर से उस एजेंसी को भी नहीं बदला गया, जिस पर नकदी एकत्रित करके गणना कक्ष तक ले जाने का दायित्व है। बताया जा रहा है कि इस कार्य में लगे रहे सभी कर्मी पूर्व की भांति ड्यूटी पर हैं।

हालांकि, ट्रस्ट ने अपने स्तर से संदिग्ध कर्मियों को हटा दिया है और एक पूर्व सैन्य अधिकारी की निगरानी में प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दान में मिली नकदी की गणना का दायित्व भारतीय स्टेट बैंक को सौंपा गया है। बैंक ने अपने नौ कर्मियों को लगा रखा है। ये कर्मी कई वर्षों से निरंतर यह कार्य कर रहे हैं। बैंक ने वाराणसी की सैनिक सर्विसेज कंपनी को भी अधिकृत कर रखा है, जिसके लगभग 25 कर्मी दानपात्रों से नकदी एकत्र करते हैं।

गिनती की निगरानी बैंककर्मी, तो नकदी की गणना ट्रस्ट के छह कर्मियों के हवाले है। गत पांच जून को गणना के दौरान गबन का मामला सामने आने के बाद एसआइटी जांच शुरू हुई तो व्यापक खामियां उजागर हुईं। बैंककर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठे। ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने भी सामने आकर दो बैंककर्मियों का नाम लेकर सवाल उठाए। इसके बाद भी अभी तक किसी कर्मचारी को बैंक प्रबंधन ने नहीं हटाया।

प्रबंधक अनूप त्रिपाठी का कहना ने क्या कहा?

एसबीआइ अयोध्या के शाखा प्रबंधक अनूप त्रिपाठी का कहना था कि अभी किसी को नहीं हटाया गया है। किससे कार्य लिया जाएगा, यह उच्चाधिकारी निर्धारित करेंगे। अभी मामले की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसआइटी में एफआइआर दर्ज करने और ट्रस्ट को दोबारा गठित करने की सिफारिश की गई है। किसी सीनियर अफसर को मंदिर का सीईओ नियुक्त करने का भी सुझाव है। टीम ने बताया कि 20 पन्नों की यह शुरुआती रिपोर्ट है। इसमें 150 लोगों से पूछताछ की डिटेल है। एसआइटी ने पिछले पांच साल के चढ़ावे का आडिट कराने की भी सिफारिश की है।

चढ़ावे में अनियमितता रोकने के लिए सुझाव दिए हैं। एसआइटी ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पीएमओ तय करेगा कि ट्रस्ट के किन सदस्यों को रखा जाए और किन्हें हटाया जाए। अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक, दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मिलीं। एसआइटी ने ऐसे करीब 150 सेवादारों और कर्मचारियों को चिह्नित किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बदलाव आया। बताया जा रहा है कि इनमें चंपतराय के करीबी माने जाने वाले फूलकांत मिश्रा भी शामिल हैं। उनके पास तीन महंगी कारें हैं, जिनकी कुल कीमत 25 लाख है।

जांच के दायरे में सेवादार और करीबी

एसआइटी ने अब तक करीब 150 लोगों से पूछताछ की है। जांच में सामने आया कि दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। टीम ने ऐसे 150 सेवादारों और कर्मचारियों को चिह्नित किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति में 22 जनवरी 2024 (प्राण प्रतिष्ठा) के बाद अचानक बड़ा उछाल आया है। इनमें महासचिव चंपत राय के करीबी फूलकांत मिश्रा भी शामिल हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ बन सकते हैं नृपेंद्र मिश्र राम मंदिर की दानराशि में गबन मामले की एसआइटी जांच के बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व पूर्व आइएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। दरअसल, रामजन्मभूमि परिसर में प्रमुख मंदिरों का निर्माण पूरा होने के साथ ही निर्माण समिति का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

इसके बाद सभी प्रकल्प ट्रस्ट को सौंप दिए जाएंगे। नृपेंद्र मिश्र गठन के समय से ही ट्रस्ट के सदस्य रहे हैं और पूर्व में पीएमओ में प्रमुख सचिव की भूमिका भी निभा चुके हैं। शुरुआत में प्रकरण पर चुप्पी साधने वाले नृपेंद्र मिश्र के हालिया बयानों से इस संभावना को बल मिला है। उन्होंने दानराशि की चोरी को डाका करार देते हुए ट्रस्टियों के स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता में बड़ी चूक माना है।

उन्होंने हर स्तर पर निगरानी मजबूत करने की वकालत की, हालांकि उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय को निर्दोष बताते हुए उनका बचाव किया था। गौरतलब है कि सात जून को मंदिर से चढ़ावा चोरी होने का प्रकरण सामने आया था, इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पोस्ट करके ट्रस्ट और सरकार को घेरा था। सरकार ने ट्रस्ट के कहने पर एसआइटी का गठन किया था, जिसने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मंगलवार को प्रदेश सरकार सौंप दी है। 

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