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    रालोद को बड़ा झटका, प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष ने दिया इस्तीफा; जयंत चौधरी से बोले- बढ़ रहा धन-बल और परिवारवाद

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 05:14 PM (IST)

    रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने राजनीति में धन, बल और परिवारवाद के बढ़ते बोलबाले तथा किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाते हुए पार्टी से त्यागपत् ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। भाजपा से रालोद में पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष बने रामाशीष राय ने शुक्रवार को पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को लिखे पत्र में रामाशीष ने कहा है कि राजनीति में धन, बल और परिवारवाद का बोलबाला बढ़ रहा है।

    किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। छात्रों के आंदोलन, पुलिसिया उत्पीड़न, किसानों एवं नौजवानों के साथ अन्याय और जातिवाद, परिवादवाद और धनबल को लेकर रालोद शीर्ष नेतृत्व पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए रामशीष राय ने शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

    कहा कि चौ. चरण सिंह एवं चौ. अजित सिंह शोषण एवं अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते थे, लेेकिन आज संविधान पर खतरा है। वर्तमान नेतृत्व ज्वलंत विषयों पर खामोश है। राय ने कहा कि वह अपने समर्थकों से संवाद करके एक राष्ट्रीय अभियान चलाएंगे। हालांकि उनके कांग्रेस में जाने की चर्चा है।

    यह भी कहा जा रहा है कि अनुपम मिश्र को उत्तर प्रदेश का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से राय असहज थे। वह 2022 और 2024 में देवरिया से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें कोई सीट नहीं दी। 2027 में ऐसी स्थिति बनती नहीं दिख रही।

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    2021 में भाजपा छोड़कर रालोद का थामा था दामन

    रामाशीष राय 1998 से 2000 तक भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। भाजपा के टिकट पर 1997 से 2003 तक विधान परिषद सदस्य रहे। 1993 में कुशीनगर की फाजिलपुर सीट से भाजपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। बाद में हाशिए पर पहुंचने की वजह से राय ने 2021 में भाजपा छोड़कर रालोद का दामन थाम लिया।

    2022 में रालोद के प्रदेश अध्यक्ष बने। चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें चुनाव लड़ाने का भरोसा दिया था, लेकिन समीकरण नहीं बन सका। राष्ट्रीय अध्यक्ष जयन्त चौधरी को भेजे त्यागपत्र में राय ने लिखा है कि जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति का सपना अधूरा है।

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    राजनीतिक शक्ति कुछ हाथों में केंद्रित हो गई है। उन्होंने पत्र में अटल बिहारी बाजपेयी और जय प्रकाश नारायण का नाम लिखा है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जिक्र न करने से वह रालोद कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गए। राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी का कहना है कि राय के इस्तीफे के कारणों का पता नहीं, लेकिन चर्चा थी कि वो चुनाव लड़ना चाहते थे।