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    SIR in UP: तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को सुनवाई में जाने से मिलेगी राहत

    By Shobhit Srivastava Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Fri, 06 Feb 2026 06:38 PM (GMT+05:30)

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    यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा (बीच में)

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    HighLights

    1. बीएलओ नोटिस देने जब आएं उसी समय मतदाता अपने कागज करा दें अपलोड

    2. प्रदेश में तार्किक विसंगति वाले हैं 2.22 करोड़ मतदाता, सभी को मिलना है नोटिस

    राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत प्रदेश में 2.22 करोड़ मतदाता तार्किक विसंगति (लाजिकल एरर) वाले मिले हैं। चुनाव आयोग इन सभी को नोटिस दे रहा है।

    इनके लिए राहत की बात यह है कि इन्हें सुनवाई के लिए केंद्र जाने की बाध्यता चुनाव आयोग ने खत्म कर दी है। बीएलओ जब नोटिस देने आएं उसी समय मतदाता अपने कागज एप से अपलोड करा दें। बीएलओ मौके से ही मतदाता की फोटो भी खींचकर अपलोड कर देंगे।

    चुनाव आयोग के साफ्टवेयर ने मतदाताओं के रिकार्ड मिलाने के बाद पांच तरह की तार्किक विसंगतियां पकड़ी हैं। इन मतदाताओं की वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग तो हो गई है, लेकिन वे संदेह के घेरे में हैं। इनमें पहला पिता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल न खाना है। दूसरी श्रेणी में ऐसे मतदाताओं के नाम हैं जिनके छह या छह से अधिक बेटों ने मैपिंग की है। तीसरी श्रेणी में ऐसे नाम हैं जिनमें मतदाता व उनके माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से कम का अंतर है।

    चौथी श्रेणी में ऐसे मतदाताओं के नाम छांटे गए हैं जिनमें बाबा व पौत्र-पौत्री की उम्र में 50 वर्ष से कम का अंतर है। पांचवीं श्रेणी में उन मतदाताओं को रखा गया है जो इस समय 45 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के हैं और पिछले एसआईआर यानी 2003 की मतदाता सूची में उनके माता-पिता का तो नाम है किंतु उनका नाम दर्ज नहीं है।

    चुनाव आयोग ने इनके लिए राहत प्रदान कर दी है। हालांकि इन्हें बीएलओ को अपने कागज देकर अपलोड कराना होगा और अपनी फोटो भी खिंचवानी होगी। ऐसा न करने वाले मतदाताओं को सुनवाई के लिए केंद्र जाना ही पड़ेगा।

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