विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सपा का '27 हजार' का गणित, 2022 की हार वाली सीटों को पलटने और 2027 में बहुमत पाने का बनाया मास्टर प्लान

Published: Tue, 29 Sep 2026 03:03 AM (IST)

सपा ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए हर सीट पर 27,000 वोट बढ़ाने का मास्टर प्लान बनाया है, जिसका लक्ष्य ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सपा का 27,000 वोट बढ़ाने का लक्ष्य।

  2. 2022 की कम अंतर वाली भाजपा सीटों को पलटने की रणनीति।

  3. 2024 लोकसभा बढ़त और पीडीए सदस्यता अभियान पर आधारित योजना।

दिलीप शर्मा, लखनऊ। वर्ष 2027 के विधान सभा चुनाव के लिए हर सीट पर 27,000 हजार वोट बढ़ाने के फार्मूले में सपा की बहुमत तक पहुंचने की रणनीति छिपी हुई है। सपा की कोशिश वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में भाजपा की उन सीटों का परिणाम पलटाने की है, जिन पर जीत का अंतर 27,000 वोटों तक रहा था। सपा की भी ऐसी 93 सीटें थीं, जिनमें जीत का अंतर इतने तक ही रहा था।

अब सपा ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से मिले आधार पर ये फार्मूला बनाया है। सपा को उस चुनाव में ऐसी 72 सीटों पर बढ़त मिली थी, जहां भाजपा जीती थी। सपा की कोशिश लोकसभा की इस बढ़त को बनाए रखने और इसका अन्य विधान सभा क्षेत्रों में विस्तार करने की है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 20 सितंबर को सभी सीटों पर 27,000 वोट बढ़ाने की रणनीति को उजागर किया था। सूत्रों के मुताबिक यह रणनीति पूरी तरह आंकड़ों के आधार पर बनी है। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा की 255 सीटों में से आठ सीटों पर जीत का अंतर एक हजार से कम, 18 पर एक से पांच हजार, 35 पर पांच से 10 हजार और 61 पर 10 हजार वोट से कम था। जबकि 35 सीटों पर अंतर 10 से 20 हजार और 45 पर 20 से 27 हजार के बीच था।

सपा इनको और अपनी ऐसी ही 93 सीटों को मिलाकर 234 सीटों पर मजबूत होना चाहती है। वर्ष 2022 में सपा 111 सीटें जीती थी और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे 183 विधान सभा क्षेत्रों में भाजपा पर बढ़त मिली थी। इसके साथ उसके गठबंधन में शामिल कांग्रेस को 39 क्षेत्रों में बढ़त मिली थी। इस तरह वर्ष 2022 में भाजपा की जीत वाली सीटों में कुल 109 पर गठबंधन आगे रहा था। इनमें 27,000 हजार वोट तक के अंतर वाली भी कुछ सीटें भी थीं। ऐसी सीटों में सुलतानपुर व लंभुआ और अयोध्या क्षेत्र की बीकापुर व रुदौली आदि सीटें शामिल हैं।

सपा इन आंकड़ों को जीत की गारंटी के बजाय मतदाताओं के रुख में बदलाव के तौर पर देख रही है। इसे स्थायी समर्थन में बदलने के लिए ही हर बूथ पर पीडीए सदस्यता अभियान को प्रभावी तरीके से चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सभी को कम से कम 300 नये सदस्य जोड़ने के लिए कहा गया है।

पार्टी का मानना है कि यदि सदस्यता बढ़ाकर समर्थन जुटाने की रणनीति इस लक्ष्य के आसपास भी रही तो बड़ी संख्या में सीटों पर परिणाम उसके पक्ष में आ सकता है। हालांकि लोकसभा और विधान सभा चुनाव में मतदाता की प्राथमकिता कई बार अलग रहती है, ऐसे में सपा की चुनौती आसान नहीं।

यह भी पढ़ें- 'अमित शाह और सुनील बंसल संभालें कमान, तभी मिलेगी बड़ी जीत', संजीव बालियान का बड़ा बयान