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मध्य प्रदेश के सागर हादसे के बाद लखनऊ में बढ़ी चिंता, फिर ताजा हुईं पुराने शराब कांडों की खौफनाक यादें

Published: Mon, 07 Sep 2026 02:24 PM (IST)

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद लखनऊ में भी पुराने शराब कांडों की यादें ताजा हो गईं।

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HighLights

  1. लखनऊ में जहरीली शराब से दशकों में दर्जनों लोगों की मौतें।

  2. अवैध शराब कारोबार पर स्थायी लगाम लगाने में प्रशासन विफल।

  3. अधिकारी दफ्तर के बजाय फील्ड से करें कार्रवाई, तभी रुकेगा।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद राजधानी लखनऊ में भी पुराने शराब कांडों की यादें ताजा हो गई हैं। पिछले दो दशक में राजधानी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जहरीली व मिलावटी शराब कई परिवारों को उजाड़ चुकी है।

वर्ष 2003 में अमीनाबाद-कैसरबाग से शुरू हुआ यह सिलसिला 2015 के मलिहाबाद शराब कांड और 2020 के बंथरा कांड तक पहुंचा। बड़े हादसों के बाद पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, जांच बैठी और अवैध शराब के खिलाफ अभियान चले, लेकिन कुछ समय बाद निगरानी फिर ढीली पड़ती गई।

कार्रवाई के बाद फिर लौट आता है अवैध कारोबार

राजधानी में जहरीली शराब की घटनाओं का इतिहास बताता है कि हर बड़े हादसे के बाद कार्रवाइयों का कोई स्थायी असर नहीं दिखा। खासकर ग्रामीण इलाकों में कच्ची शराब की भट्ठियां और अवैध बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अवैध शराब का नेटवर्क दोबारा कैसे सक्रिय हो जाता है। सागर की घटना ने राजधानी के पुराने शराब कांडों और मौजूदा निगरानी व्यवस्था को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मगर इन सबके बीच हकीकत यह भी है कि अधिकारी दफ्तर में ही बैठकर कार्रवाई का आंकड़ा तैयार कर लेते हैं, फील्ड पर जाएं तो ऐसी घटनाओं पर शिकंजा कसा जा सकता है।

2003 : अमीनाबाद-कैसरबाग में 16 मौतें

सितंबर 2003 में अमीनाबाद और कैसरबाग क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से 16 लोगों की मौत हुई थी। शराब के नमूनों में मेथनॉल की पुष्टि हुई थी। घटना ने राजधानी में अवैध शराब के कारोबार और आबकारी-पुलिस की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद संबंधित पुलिस और आबकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।

2015 : मलिहाबाद में सबसे बड़ा शराब कांड

जनवरी 2015 में मलिहाबाद के दतली और खड़ता गांवों में जहरीली शराब ने बड़े पैमाने पर कहर बरपाया। इस घटना में 50 से अधिक लोगों की मौत बताई गई थी।

कई लोगों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले में पुलिस और आबकारी विभाग के आठ अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया गया। कार्रवाई के बावजूद बाद के वर्षों में मलिहाबाद क्षेत्र में अवैध शराब की भट्ठियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रहीं।

2016 : गोसाईंगंज में दो की जान गई

सितंबर 2016 में गोसाईंगंज के मादरमऊ गांव में जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत का मामला सामने आया। घटना के बाद एक बार फिर पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया गया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसकी बिक्री और निर्माण पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका।

2020 : बंथरा में छह मौतों से मचा हड़कंप

नवंबर 2020 में बंथरा के रसूलपुर और लतीफनगर गांवों में मिलावटी शराब पीने से छह लोगों की मौत हो गई थी। कई अन्य लोगों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद बंथरा इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और मजिस्ट्रेटी जांच कराई गई।

आप लोगों को क्या पता। कुछ भी कहकर आरोप लगा देते हैं। हमने क्या कार्रवाई की इसका हमारे पास आंकड़ा है।
करुणेंद्र सिंह सचान, आबकारी अधिकारी

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