यूपी सरकार की कार्यप्रणाली पर SC ने जताई नाराजगी, कर्मचारी को 15 साल तक भटकाने पर लगाया 1 लाख का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने एक कर्मचारी की पोस्टिंग में देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सरकार को एक लाख रुपये का हर्जाना ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

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पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक कर्मचारी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को अपनी पसंद की पोस्टिंग के लिए साल 2011 से भटकने के लिए मजबूर किया गया।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह उस कर्मचारी को हर्जाने के तौर पर एक लाख रुपये का भुगतान करें। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह कर्मचारी को तुरंत उत्तराखंड राज्य में भेजने की प्रक्रिया पूरी करें।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला कर्मचारी की उस अपील पर सुनाया, जिसमें उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के अप्रैल 2018 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
कर्मचारी ने मांग की थी कि उसका कैडर उत्तर प्रदेश से बदलकर उत्तराखंड किया जाए, क्योंकि 1995 की परीक्षा के समय उसने पहाड़ी क्षेत्र का विकल्प चुना था। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि एक व्यक्ति 1997 में नियुक्ति के लिए पात्र हो गया था, लेकिन उसे असल में नौकरी 2011 में मिली।
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आज 2026 में भी वह अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है। पीठ ने नोट किया कि जब 2004 में हाई कोर्ट ने उसकी नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया था, तो उसे तभी नौकरी मिल जानी चाहिए थी। पीठ ने पाया कि सरकार की अपील 2009 में खारिज हो गई थी, फिर भी उसे नियुक्ति देने में 2011 तक का समय लगा दिया गया।