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Apple के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी के हत्यारे बर्खास्त सिपाही प्रशांत को दस वर्ष कारावास, आठ वर्ष काट चुका है सजा

Published: Mon, 21 Sep 2026 06:03 PM (IST)

Lucknow Crime: अदालत ने सबूतों के आधार पर माना कि प्रशांत चौधरी का पहले से विवेक तिवारी की हत्या करने का कोई उद्देश्य नहीं था।

सजा के बाद कोर्ट से बाहर आता उत्तर प्रदेश पुलिस से बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी, विवेक तिवारी (फाइल फोटो)

सजा के बाद कोर्ट से बाहर आता उत्तर प्रदेश पुलिस से बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी, विवेक तिवारी (फाइल फोटो) 

HighLights

  1. आठ वर्ष से जेल में बंद प्रशांत चौधरी को दस वर्ष को कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना

  2. सजा से संतुष्ट नहीं विवेक तिवारी की पत्नी और उनके परिवार के लोग

रोहित कांत, लखनऊ। राजधानी के बहुचर्चित एपल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस से बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को दस की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। विवेक तिवारी की पत्नी और उनके परिवार के लोग इस सजा से संतुष्ट नहीं हैं। अब उनकी हाई कोर्ट में अपील करने की योजना है।

सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने इसके पहले 17 सितंबर को अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया था। अदालत ने सबूतों के आधार पर माना कि प्रशांत चौधरी का पहले से विवेक तिवारी की हत्या करने का कोई उद्देश्य नहीं था।

उस दिन यह घटना अचानक हुई, जिससे प्रशांत चौधरी को हत्या का दोषी नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, सह-अभियुक्त संदीप कुमार के संबंध में अभियोजन की तरफ से पर्याप्त साक्ष्य का अभाव पाया गया, जिसके चलते न्यायालय ने उसे बरी करने का आदेश दिया।

कोर्ट में नहीं आए विवेक तिवारी के स्वजन

विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी व उनके स्वजन सोमवार को न्यायालय नहीं आए। उनका कहना है कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में न्यायालय जाने का कोई फायदा नहीं। वह न्याय के लिए हाईकोर्ट जाएंगे। उनके भाई विष्णु शुक्ला ने बताया कि प्रशांत चौधरी को हत्या का दोषी न मानकर गैर इरादतन हत्या का दोषी माना है। इससे हम लोग निराश हुए हैं। परिचित वकीलों से संपर्क कर रहे हैं। अदालत के आर्डर की कापी मिलने के बाद बिंदुवार समझा जाएगा। उसके बाद हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

29 सितंबर को दर्ज हुई थी पहली रिपोर्ट

मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी की ओर से पैरवी कर रहे विशेष अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने न्यायालय में बताया कि इस हत्याकांड की पहली रिपोर्ट सना खान ने 29 सितंबर 2018 को थाना गोमतीनगर में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि घटना वाली रात वह अपने सहकर्मी विवेक तिवारी के साथ लौट रही थीं। तभी दो अज्ञात पुलिस वालों ने उनकी कार रोकने की कोशिश की। डर के कारण जब उन्होंने कार निकालने की कोशिश की तो एक पुलिस वाले ने विवेक तिवारी पर गोली चला दी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

एक दिन बाद दूसरी रिपोर्ट

दूसरी रिपोर्ट विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने 30 सितंबर को दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति की हत्या प्रशांत चौधरी व संदीप ने की थी। शुरुआत में मामले की जांच लखनऊ पुलिस ने की, बाद में राज्य सरकार ने इसकी करीबी निगरानी की। एसआइटी गठित हुई। कल्पना तिवारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि घटना के बाद सना खान को पुलिस वालों ने दबाव डालकर बोल-बोल कर लिखवाकर दस्तखत कराए हैं। लिहाजा बाद में दी गई तहरीर को पूर्व में लिखी गई रिपोर्ट में शामिल करते हुए विवेचना की गई।

आठ गवाहों का कराया गया परीक्षण

इस मामले की विवेचना प्रभारी कोतवाली महानगर विकास चंद्र पाण्डेय को सौंपी गई। अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों का परीक्षण कराया गया। 26 नवम्बर 2024 को दोनों अभियुक्तों का 313 सीआरपीसी के अंतर्गत बयान दर्ज किया गया। बचाव पक्ष ने भी फोरेंसिक विशेषज्ञों सहित अपनी तरफ से 8 सफाई साक्ष्य पेश किए। मामले में अभियुक्त प्रशांत कुमार चौधरी पर 22 मार्च 2019 को धारा 302 व 323 में आरोप तय हुआ। दूसरे आरोपित संदीप कुमार पर धारा 302 के साथ धारा 114 व 323 के अंतर्गत आरोप तय हुआ।

टायर या बोनट को बनाया जाना चाहिए था निशाना

अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि रोके जाने पर विवेक तिवारी ने भागने के प्रयास में कार से पुलिस की बाइक को कम से कम दो बार टक्कर मारी और गोली चलने के समय कार का अगला पहिया बाइक के पहिये पर चढ़ा था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रशांत चौधरी को निजी प्रतिरक्षा का अधिकार प्राप्त था, लेकिन प्रशिक्षित पुलिसकर्मी होने के नाते उसे टायर या बोनट पर निशाना साधना चाहिए था।

अधिकार का अतिक्रमण

कोर्ट ने माना की सामने के शीशे से चालक की ओर गोली चलाकर उसने अपने अधिकार का अतिक्रमण किया। कोर्ट के अनुसार, पूरी घटना एक मिनट से भी कम समय में अचानक हुई, किसी पूर्व रंजिश या साजिश का साक्ष्य नहीं मिला और आरोपी ने भरी मैगजीन होते हुए भी केवल एक गोली चलाई। ऐसे में कृत्य मृत्यु कारित करने के आशय से नहीं, बल्कि इस ज्ञान के साथ किया गया कि इससे मृत्यु संभव है।

संदीप के खिलाफ उकसाने का साक्ष्य नहीं

संदीप कुमार के संबंध में अदालत ने कहा कि उसकी ओर से उकसावे या सहायता का कोई साक्ष्य नहीं है और केवल घटनास्थल पर मौजूदगी के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सना पर डंडे से हमले का आरोप भी साबित नहीं हो सका, क्योंकि पहली चिकित्सीय जांच में कोई चोट नहीं पाई गई थी और संदीप से डंडा नहीं, बल्कि इंसास राइफल बरामद हुई थी।

विदेश में है सना खान

विवेक तिवारी की सहकर्मी रही सना खान इन दिनों भारत में नहीं हैं। सना उस रात कार में विवेक के साथ थी। विवेक तिवारी की हत्या के कुछ वर्ष बाद उसका निकाह हो गया और वह पति के साथ विदेश में शिफ्ट हो गईं।

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