चीन के बीजिंग की तर्ज पर यूपी में ‘एक एयरशेड, एक प्लान’, 700 करोड़ से तैयार होगा एकीकृत प्रदूषण नियंत्रण मॉडल
उत्तर प्रदेश वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए चीन के बीजिंग मॉडल को अपनाएगा, जिसमें पूरे एयरशेड को एक इकाई मानकर ₹700 करोड़ का एकीकृत प्लान बनेगा। इस रणनीति में निगरानी, प्रदूषण स्रोतों की पहचान और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

बीजिंग की तर्ज पर प्रदेश में ‘एक एयरशेड, एक प्लान’।
HighLights
यूपी में वायु प्रदूषण नियंत्रण को चीन का बीजिंग मॉडल।
₹700 करोड़ से एकीकृत निगरानी और निर्णय समर्थन प्रणाली।
पुराने वाहनों को हटाकर ई-बसों, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा।
शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा तो सिर्फ दिल्ली में कार्रवाई करने से हवा साफ नहीं होगी और लखनऊ की वायु गुणवत्ता खराब है तो केवल लखनऊ में उठाए गए कदम भी पर्याप्त नहीं होंगे। हवा की कोई सीमा नहीं होती, इसलिए वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई भी सीमाओं से बाहर जाकर लड़नी होगी। चीन के बीजिंग-तियानजिन-हेबेई माडल से प्रदेश ने यही सबसे अहम सबक लिया है।
अब प्रदेश में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिलों और विभागों से आगे बढ़कर पूरे एयरशेड को एक इकाई मानकर साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत करीब 700 करोड़ रुपये से निगरानी ढांचे, प्रदूषण स्रोतों की पहचान और एकीकृत निर्णय समर्थन प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।
विश्व बैंक की तकनीकी सहायता से 25 जुलाई से दो अगस्त तक चीन के बीजिंग, शिजियाझुआंग, वुहान और यिचांग का दौरा करने वाले वन मंत्री डा. अरुण कुमार सक्सेना के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने वहां के वायु गुणवत्ता प्रबंधन माडल का अध्ययन किया।
चीन की सबसे बड़ी सीख यह रही कि उसने बीजिंग की हवा को केवल बीजिंग में कार्रवाई करके साफ नहीं किया, बल्कि आसपास के विशाल क्षेत्र को एक इकाई मानकर एक योजना, साझा डाटा और समान मानकों के आधार पर कार्रवाई की है। अब इसी आधार पर प्रदेश भी रणनीति बना रहा है।
इंडो-गैंजेटिक एयरशेड में स्थित उत्तर प्रदेश की वायु गुणवत्ता पर आसपास के राज्यों और पड़ोसी देशों का भी असर पड़ता है। हालांकि प्रदेश में पीएम 2.5 के करीब 56 प्रतिशत स्रोत राज्य की अपनी सीमाओं के भीतर हैं।
ऐसे में बाहरी प्रदूषण के साथ-साथ प्रदेश के भीतर के स्रोतों पर भी एक साथ कार्रवाई जरूरी है। चीन के माडल में बीजिंग-तियानजिन-हेबेई क्षेत्र को इसी तरह एक साझा एयरशेड मानकर प्रबंधन किया गया।
चीन के अनुभव ने यह भी दिखाया कि लगातार निगरानी का असर होता है। वर्ष 2013 से 2025 के बीच बीजिंग में पीएम 2.5 में 69.8 प्रतिशत की कमी आई। प्रदेश में भी प्रदूषण की निगरानी को केवल कुछ मानिटरिंग स्टेशनों तक सीमित रखने के बजाय सैटेलाइट, टावर, ग्राउंड सेंसर, मोबाइल लैब और एआई आधारित प्रणालियों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की योजना है। उद्योगों से उत्सर्जन का रियल टाइम डाटा लिया जाएगा।
प्रदूषण की स्थिति का पूर्वानुमान लगाने के साथ अलर्ट जारी किया जाएगा। परिवहन क्षेत्र में पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले बीएस-वन, टू व थ्री श्रेणी के भारी वाहनों को तेजी से हटाने का प्रस्ताव है। साथ ही 500 ई-बसों के संचालन, पांच डिपो का इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यापक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्लान तैयार किया जाएगा।
चीन में 23 लाख पुराने अधिक उत्सर्जन वाले वाहनों को हटाया गया और बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी वाहनों को बढ़ावा दिया गया है। औद्योगिक प्रदूषण पर कार्रवाई का माडल भी बदलेगा। चीन की तर्ज पर ईंट-भट्ठों, एमएसएमई क्लस्टरों और बड़े उद्योगों की परफार्मेंस ग्रेडिंग की दिशा में कदम बढ़ेंगे।
