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आयुष काउंसलिंग की तैयारी तेज, आयुर्वेद और यूनानी कॉलेजों को जल्द मिलेगी मान्यता

Published: Sat, 08 Aug 2026 08:32 AM (IST)

एमबीबीएस और बीडीएस की राज्य कोटे की काउंसलिंग शुरू होने के साथ ही आयुष चिकित्सा पद्धति की सीटों के लिए ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आयुष चिकित्सा पद्धति की सीटों के लिए काउंसलिंग तैयारी तेज हुई।

  2. आयुर्वेदिक और यूनानी कॉलेजों को NCISM से मान्यता लंबित है।

  3. आयुष विभाग ने आपत्तियों का समाधान कर शपथ पत्र भेजा।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। एमबीबीएस और बीडीएस की राज्य कोटे की काउंसलिंग शुरू होने के साथ ही आयुष चिकित्सा पद्धति की सीटों के लिए भी काउंसलिंग की तैयारी तेज हो गई है। हालांकि राज्य के आयुर्वेदिक और यूनानी कालेजों को अभी भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) से मान्यता नहीं मिली है।

आयुष विभाग ने आयोग की आपत्तियों का समाधान करते हुए शपथ पत्र भेज दिया है, जिससे जल्द मान्यता मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक वर्ष एनसीआइएसएम की टीम आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी कालेजों में शिक्षकों, आधारभूत सुविधाओं और प्रयोगशालाओं का निरीक्षण करती है।

इस वर्ष समय पर जवाब न मिलने से आयुर्वेद और यूनानी कालेजों की मान्यता लंबित रही, जबकि राज्य के सभी होम्योपैथी कालेजों को मान्यता मिल चुकी है।

आरटीई : 18 निजी स्कूलों को मिला एक महीने का समय
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के दाखिले को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी विशाख जी के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रवेश न लेने वाले 18 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी कर एक महीने का समय दिया है। इसके बाद यदि प्रवेश नहीं लेते हैं तो मान्यता रद करने का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जाएगा।

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बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जिले में करीब 97 निजी स्कूल ऐसे चिह्नित किए गए थे, जो आरटीई के तहत आवंटित बच्चों के दाखिले में सहयोग नहीं कर रहे थे। इनमें शहर के कई बड़े और प्रतिष्ठित स्कूल भी शामिल हैं। प्रशासन की सख्ती और लगातार निगरानी के बाद इन स्कूलों ने अब तक 1400 से अधिक बच्चों का प्रवेश लिया है।

आरटीई के तहत पात्र बच्चों को प्रवेश देना स्कूलों की कानूनी जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। वहीं अभिभावक संघ के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव का आरोप है कि जब तक मान्यता रद नहीं होगी, स्कूलों की मनमानी जारी रहेगी। पिछले पांच साल में किसी भी स्कूल की मान्यता रद नहीं की गई है।

 

 

 

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