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    यूपी में घर बनाना हुआ महंगा, पत्थरों से लेकर मौरंग तक की दरों में होगी बढ़ोतरी

    Updated: Fri, 30 Jan 2026 07:29 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश में घर बनाना अब महंगा हो जाएगा क्योंकि राज्य सरकार ने ग्रेनाइट, मौरंग और अन्य उपखनिजों की दरों में वृद्धि को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    HighLights

    1. घर बनाने के लिए अब अधिक राशि खर्च करनी होगी।

    2. ग्रेनाइट, मौरंग सहित अन्य उपखनिजों की दरें बढ़ीं।

    3. कैबिनेट ने खनिज परिहार नियमावली-2021 संशोधन को मंजूरी दी।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। घर बनाने के लिए अब लोगों को पहले से ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ेगी। प्रदेश में ग्रेनाइट आदि पत्थरों से लेकर मौरंग तक की दरों में बढ़ोतरी होने जा रही है। खनन विभाग ने उपखनिजों के स्वामित्व की दरों और वार्षिक अपरिहार्य भाटक (डेड रेंट) में बढ़ोतरी के लिए उत्तर प्रदेश खनिज परिहार नियमावली-2021 में द्वितीय संशोधन का का प्रस्ताव दिया था, जिसे गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है।

    प्रस्ताव के तहत ग्रेनाइट साइज्ड डायमेंशनल स्टोन के स्वामित्व की दर को एक मीटर या उससे अधिक आकार के लिए पांच हजार रुपये प्रति घनमीटर से बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रति घनमीटर, एक मीटर से कम साइज के लिए तीन हजार रुपये से बढ़ाकर चार हजार रुपये प्रति घनमीटर, स्लैब के लिए 650 रुपये प्रति घनमीटर से बढ़ाकर 850 रुपये प्रति घनमीटर की गई है।

    ग्रेनाइट और डेलोस्टोन के लिए स्वामित्व की दर 160 रुपये प्रति घनमीटर से बढ़ाकर 165 रुपये प्रति घनमीटर, सैंडस्टोन व क्वार्टजाइट के लिए 110 रुपये प्रति घनमीटर से बढ़ाकर 140 रुपये प्रति घनमीटर, नदी तल में उपलब्ध मौरंग के लिए 150 रुपये प्रति घनमीटर से बढ़ाकर 190 रुपये प्रति घनमीटर, पहाड़ों के क्षरण से बनने वाली लाल मौरंग के लिए 75 रुपये प्रति घनमीटर से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति घनमीटर कर दिया गया है।

    वहीं साधारण बालू की दर में भी 15 रुपये प्रति घनमीटर की वृद्धि की गई है। चूना पत्थर पर पूर्व में स्वामित्व की दर 150 रुपये प्रति टन थी, अब इसे सूची से बाहर कर दिया गया है। इनके अलावा पायरोफिलाइट के लिए स्वामित्व की दर 300 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 340 रुपये प्रति टन, डायस्पोर के लिए 50 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 525 रुपये प्रति टन, सिलिका सैंड के लिए 100 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति टन कर दी गई है।

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    इसके साथ ही उपखनिजों के लिए वार्षिक अपरिहार्य भाटक (डेड रेंट) भी बढ़ा दिया गया है। इसमें मार्बल व मार्बल चिप्स के लिए डेड रेंट को 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये, सैंड स्टोन एवं क्वार्टजाइट के लिए 65 हजार रुपये से बढ़ाकर 97,500 रुपये, ग्रेनाइट व डेलोस्टोन के लिए 1.20 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये, इमारती पत्थर-गिट्टी के लिए 90 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.35 लाख रुपये, नदी तल की मौरंग के लिए 90 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.35 लाख रुपये, पहाड़ों के क्षरण से मिलने वाली लाल मौरंग के लिए 24 हजार रुपये से बढ़ाकर 36 हजार रुपये, साधारण बालू (प्रथम श्रेणी) के लिए 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये, साधारण बालू (द्वितीय श्रेणी) के लिए 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 45 हजार रुपये, साधारण मृदा के लिए 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है।

    वहीं पायरोफिलाइट, डायस्पोर, सिलिका सैंड, चाइना क्ले, कैलसाइट व अन्य उपखनिजों के लिए डेडरेंट 20 रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया है। हालांकि चूना पत्थर (लाइम स्टोन) के लिए पूर्व में 40 हजार रुपये डेड रेंट था, अब इसे सूची से बाहर कर दिया गया है।