यूपी के बुनकरों की बदलने वाली है किस्मत, हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना में मिलेंगे पांच बड़े फायदे
Hathkargha Bunakar Samriddhi Yojana | योगी सरकार की 'मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना' यूपी के बुनकरों के लिए संजीवनी बनी ...और पढ़ें

UP Handloom Weaver Scheme | मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना।
HighLights
बुनकरों को 80% सब्सिडी पर मिलेंगे सोलर लूम।
बिचौलियों से मुक्ति, सीधा ई-कॉमर्स से जुड़ेंगे बुनकर।
आसान ऋण, आधुनिक प्रशिक्षण से बढ़ेगी आय।
साक्षी गुप्ता, लखनऊ। Hathkargha Bunakar Samriddhi Yojana | उत्तर प्रदेश में जब भी कला और संस्कृति की बात होती है तो बुनकरों की उंगलियों के जादू की चर्चा तो जरूर होती है। बनारस की रेशमी साड़ियों से लेकर भदोही के कालीनों तक...यूपी के बुनकर सदियों से प्रदेश की संस्कृति के ताने-बाने को बुनते आ रहे हैं।
लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि अपनी मेहनत और कला से दूसरों की ज़िंदगी को खूबसूरत बनाने वाला यह तबका लंबे समय से तंगी, महंगे धागों, बिजली बिलों और बिचौलियों की मार झेल रहा था। कई बुनकर तो रोजी-रोटी के चक्कर में अपना पुश्तैनी काम छोड़कर मजदूरी करने तक को मजबूर हो गए थे।
(UP Handloom Weaver Scheme) इन बुनकरों के लिए योगी सरकार की 'मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना' संजीवनी बूटी की तरह है। इस योजना का उद्देश्य यूपी के कपड़े को पूरी दुनिया के बाजारों तक पहुंचाना है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि यह योजना कैसे यूपी के बुनकरों की किस्मत बदलने जा रही है और इसमें उनके लिए क्या-क्या खास छिपा है।
क्या है 'हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना?
हाथ से चलने वाले पारंपरिक करघों पर काम करने में समय और ताकत बहुत लगती थी, लेकिन मुनाफा बिचौलिए खा जाते थे। दूसरी ओर बिजली का बढ़ता खर्चा और कच्चे माल (धागे) के बढ़ते दाम ने भी बुनकरों की कमर तोड़ रखी थी।
यूपी सरकार के इस योजना से बुनकरों को राहत मिली है। इसके तहत बुनकरों को आधुनिक तकनीक (जैसे सोलर पावर से चलने वाले करघे), आसानी से लोन, सब्सिडी और direct market का एक्सेस दिया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।

यूपी में बनेंगे 150 हैंडलूम क्लस्टर
मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना के तहत सरकार ने पांच वर्षों में 150 हैंडलूम क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस योजना से 50 हजार से ज्यादा बुनकरों का लाभ होगा। योजना के अनुसार न्यूनतम 25 या उससे अधिक बुनकरों के समूह को फर्म के रूप में पंजीकृत कराया जाएगा।
बुनकरों की किस्मत बदलने वाले 5 बड़े फायदे
| क्र.सं. | योजना का लाभ | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | सोलर लूम (सौर ऊर्जा करघा) पर तगड़ी सब्सिडी | बिजली के भारी-भरकम बिलों और बार-बार कटने वाली लाइट से निजात दिलाने के लिए सरकार बुनकरों को सोलर लूम दे रही है। इस पर 80% तक की छूट (सब्सिडी) मिल रही है। |
| 2 | सस्ते धागे और कच्चा माल | बुनाई के लिए सही रेट पर धागा मिले, इसके लिए यार्न बैंक (Yarn Bank) और सरकारी सहायता की व्यवस्था की गई है, जिससे लागत सीधे 20 से 30 फीसदी कम हो जाएगी। |
| 3 | बिचौलियों की छुट्टी, सीधा मुनाफा | योजना के जरिए बुनकरों को सीधे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट) और सरकारी GeM पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। यानी सामान सीधा ग्राहक को बिकेगा और पूरा पैसा बुनकर के खाते में आएगा। |
| 4 | बिना गारंटी का आसान लोन | नया करघा लगाने या व्यापार बढ़ाने के लिए बुनकरों को बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार बहुत ही कम ब्याज दर पर क्रेडिट कार्ड और लोन की सुविधा दे रही है। |
| 5 | आधुनिक ट्रेनिंग और नए डिजाइन | बाजार का ट्रेंड हर समय बदलता रहता है। ऐसे में आजकल क्या ट्रेंड कर रहा है, यह सिखाने के लिए बुनकरों और उनकी नई पीढ़ी को मुफ्त में आधुनिक डिजाइनिंग और कंप्यूटर बेस्ड बुनाई की ट्रेनिंग दी जा रही है। |
अब ऑनलाइन बिकेंगे गांव के बने कपड़े
आज डिजिटल का दौर है। अगर उत्पाद इंटरनेट पर नहीं है, तो उसकी बिक्री सीमित रह जाती है। अब मऊ, बनारस या आजमगढ़ के किसी छोटे से गांव में बैठा बुनकर भी अपना बनाया हुआ कपड़ा सीधे अमेरिका, यूरोप या दिल्ली-मुंबई में बैठे ग्राहक को बेच सकता है।

सरकार न सिर्फ उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करा रही है, बल्कि पैकेजिंग और शिपिंग की कला भी सिखा रही है। इसके लिए गांव लेवल पर ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 'मेड इन यूपी' के कपड़ों की मांग तेजी से बढ़ी है।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी है कि आप उत्तर प्रदेश के निवासी हों। इसके साथ ही आपके पास आधार कार्ड, बुनकर पहचान पत्र, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और आय प्रमाण पत्र होना जरूरी है।

योजना में कैसे करें आवेदन?
योजना के आधिकारिक राज्य हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग (Directorate of Handloom) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
इसके अलावा विभाग द्वारा बुनकर बाहुल्य क्षेत्रों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाते हैं, जहां जाकर आप सीधे आवेदन कर सकते हैं। आप अपने नजदीकी जिला उद्योग केंद्र (DIC) या हथकरघा विभाग के कार्यालय में जाकर भी फॉर्म जमा कर सकते हैं।
