यूपी में अब ‘सक्षम’ से निखरेगी हेडमास्टरों का लीडरशिप, प्रदेशभर में मिलेगी ट्रेनिंग; SCERT ने तैयार किया खास मॉड्यूल
उत्तर प्रदेश राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए 'सक्षम' हस्तपुस्तिका और प्रशिक्षण माड्यूल तैयार किया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
एससीईआरटी ने प्रधानाध्यापकों के लिए 'सक्षम' माड्यूल तैयार किया।
नेतृत्व, प्रशासन और आधुनिक विद्यालय प्रबंधन पर प्रशिक्षण मिलेगा।
एनईपी, निपुण भारत मिशन पर आधारित है यह पहल।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को बेहतर शैक्षणिक नेतृत्व, प्रभावी प्रशासन और आधुनिक विद्यालय प्रबंधन के लिए तैयार करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश ने ‘सक्षम’ नाम से एक विशेष हस्तपुस्तिका और उस पर आधारित प्रशिक्षण माड्यूल तैयार किया है।
इसके प्रभावी संचालन के लिए माड्यूल की शिक्षक संदर्शिका भी विकसित की गई है। फिलहाल एससीईआरटी में मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण चल रहा है। इसके बाद प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
एससीईआरटी का मानना है कि आज के समय में प्रधानाध्यापक केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि विद्यालय के शैक्षणिक नेता, मार्गदर्शक और परिवर्तन के वाहक हैं। इसी सोच के अनुरूप तैयार यह माड्यूल उन्हें शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय और सामुदायिक दायित्वों का बेहतर निर्वहन करने के लिए सक्षम बनाएगा। विज्ञान और तकनीक के तेजी से बदलते दौर में विद्यालयों के नेतृत्व को भी नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रधानाध्यापकों को नवीन जानकारियों, नवाचारों और आधुनिक प्रबंधन कौशल से सशक्त बनाया जाएगा।
क्या है प्रशिक्षण का उद्देश्य?
माड्यूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन की अवधारणा पर आधारित है। इसमें प्रधानाध्यापकों की भूमिका को विद्यालय का संरक्षक, नेतृत्वकर्ता और समुदाय से जोड़ने वाले सेतु के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों की अधिगम उपलब्धि बढ़ाने, शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने और विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करना है।
प्रधानाध्यापकों को सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच सभी बच्चों को समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, समावेशी वातावरण तैयार करने, शैक्षणिक नेतृत्व, शिक्षण योजना और विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा, विद्यालय प्रबंधन, प्रशासनिक दक्षता, सुरक्षित वातावरण, नई तकनीकों के उपयोग, शिक्षकों के कार्य आवंटन और पर्यवेक्षण तथा अभिभावकों और समुदाय से बेहतर संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण से पहले विषय की पूरी तैयारी, पीपीटी, चार्ट, हैंडआउट और अन्य संसाधनों की व्यवस्था, प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण व गतिविधियों की पूर्व योजना बनाने पर जोर दिया गया है।
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