यूपी में घाघरा और सरयू नदी का जलस्तर बढ़ा, कई जिलों में मंडराया बाढ़ का खतरा
उत्तर प्रदेश में घाघरा, सरयू, गंगा और शारदा नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ और कटान का खतरा मंडरा रहा है। ...और पढ़ें

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HighLights
घाघरा, सरयू नदियां कई जिलों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
बाराबंकी, गोंडा, बहराइच में बाढ़ और कटान से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग ने 27 से 30 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी दी है।
जागरण टीम, लखनऊ। घाघरा, सरयू, गंगा और शारदा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। बहराइच, बाराबंकी और गोंडा में घाघरा, सरयू नदियां लाल निशान से ऊपर बह रही हैं। तटवर्ती गांवों में पानी फैलने से लोगों की चिंता बढ़ गई है, जबकि कई स्थानों पर कटान भी तेज हो गई है।
मौसम विभाग ने 27 से 30 जुलाई तक प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। ऐसे में जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। बाराबंकी में सरयू खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
चार गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है और नौ गांव बाढ़ प्रभावित घोषित किए गए हैं। गोंडा के कर्नलगंज और तरबगंज क्षेत्रों में कटान से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। कई जगह बिजली के खंभे और खेती की जमीन नदी में समा रही है। बहराइच में जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव से तटीय गांवों के लोग सतर्क हैं।
नदी में बढ़ी मगरमच्छों की संख्या
सीतापुर में शारदा और घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। लगभग 400 बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है और 125 गांव कटान की जद में हैं। वहीं लखीमपुर में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है, लेकिन नदी में बढ़ी मगरमच्छों की संख्या ने तटवर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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अयोध्या में सरयू अभी खतरे के निशान से 34 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि श्रावस्ती और बलरामपुर में राप्ती नदी फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही है। पूर्वांचल में भी बाढ़ का असर दिखने लगा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर स्थिर है, लेकिन कई घाट और मंदिर पानी से घिर गए हैं तथा जलकुंभी के कारण नाव संचालन प्रभावित हो रहा है।
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़ा है। मऊ में सरयू 24 सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है, जबकि आजमगढ़ में सरयू खतरे के निशान से मात्र 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है और कटान तेज हो गई है। बलिया में भी गंगा और सरयू के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले तीन-चार दिनों से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में मानसून कमजोर पड़ गया है।
इसी कारण से शनिवार और रविवार को अधिकांश जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ केवल बूंदाबांदी के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, 48 घंटे बाद मानसून की सक्रियता बढ़ेगी और 30 जुलाई तक पूरे प्रदेश में अच्छी बरसात का पूर्वानुमान है।
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, शुक्रवार को 38.2 डिग्री सेल्सियस के साथ फतेहपुर सबसे गर्म जिला रहा, जबकि लखीमपुर में 36 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मानसून रेखा का दक्षिण की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कमजोर होने से अगले दो दिन बारिश की गतिविधियां कुछ कमा रहेगी। राज्यभर में सोमवार से 30 जुलाई तक मध्यम से भारी बरसात की संभावना है।