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लखनऊ: वृक्ष संरक्षण नियम में बदलाव की तैयारी, कृषि भूमि पर कटान के लिए बनेंगे मॉडल नियम

Updated: Wed, 19 Aug 2026 08:39 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में वृक्ष संरक्षण नियमों को सरल बनाने की तैयारी है, जिसमें कृषि भूमि पर पेड़ काटने के लिए मॉडल नियम बनाए जाएंगे। वन मंत्री ने जनभागीदारी से पौधारोपण अभियान चलाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. कृषि भूमि पर पेड़ काटने के लिए बनेंगे मॉडल नियम।

  2. पौधारोपण महायज्ञ के तहत 40 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए।

  3. मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को चेनलिंक फेंसिंग तेज करने के निर्देश।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में वृक्ष संरक्षण से जुड़े नियमों को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप सरल और व्यावहारिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम-1976 के तहत प्रतिबंधित प्रजातियों और कृषि भूमि पर पेड़ों की कटान की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कृषि भूमि पर पेड़ों को काटने के लिए मॉडल नियम तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं और सर्वोत्तम कार्यप्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है।

वन विभाग मुख्यालय में बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि विशेष परिस्थितियों और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मौजूदा व्यवस्था में जहां जरूरी हो, वहां संशोधन कराया जाए। उन्होंने कृषि वानिकी नीति को भी जल्द अंतिम रूप देने और कृषि आधारित उद्योगों की मांग के अनुरूप पौध प्रजातियों के उत्पादन के लिए किसानों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने पौधारोपण महायज्ञ-2026 के तहत 40 करोड़ से अधिक पौधे रोपे जाने पर प्रसन्नता जताई। कहा कि इसी जनभागीदारी को आगे बढ़ाते हुए रक्षाबंधन पर ‘भाई-बहन पौधारोपण’ और शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान चलाया जाए। इन अभियानों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने पौधशालाओं में तैयार होने वाले पौधों की गुणवत्ता और वृद्धि बेहतर करने के लिए ग्राफ्टिंग तथा टिश्यू कल्चर तकनीक अपनाने के निर्देश दिए।

इसके लिए प्रत्येक वन प्रभाग के संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने को कहा गया। वहीं, रोपित पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ थर्ड पार्टी मानिटरिंग कराने के निर्देश भी दिए। बाढ़ और जलभराव वाले क्षेत्रों में पौधों को नुकसान से बचाने के लिए जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंक फेंसिंग का काम तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने तेंदुआ सफारी और रेस्क्यू सेंटरों का निर्माण जल्द पूरा कराने तथा स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक कर वन्यजीव प्रबंधन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है। चित्रकूट, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और फिरोजाबाद समेत विभिन्न जिलों में चल रही ईको टूरिज्म परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि लंबित कार्य तत्काल पूरे कर उनके लोकार्पण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।

प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने बताया कि कृषि भूमि पर पेड़ काटने और प्रतिबंधित प्रजातियों के संबंध में अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर निजी भूमि, विशेषकर कृषि भूमि पर माडल नियम तैयार किए जाएंगे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने बताया कि पौधारोपण महायज्ञ में हरड़, बहेड़ा और असना जैसी महत्वपूर्ण एवं विलुप्तप्राय होती जा रही प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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