बृहत्तर लुंबिनी का समग्र विकास: धार्मिक पवित्रता और विरासत संरक्षण का नया रोडमैप
भगवान बुद्ध की जन्मस्थली बृहत्तर लुंबिनी के समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें धार्मिक पवित्रता और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने पर जोर है।

HighLights
बृहत्तर लुंबिनी के समग्र विकास का रोडमैप तैयार, पवित्रता सुरक्षित।
विकास पर्यटन से आगे बढ़कर विरासत, पर्यावरण और आजीविका पर केंद्रित।
बड़े निर्माण से पहले गुरुयोजना, पर्यावरणीय अध्ययन अनिवार्य होंगे।
जागरण संवाददाता, भैरहवा। भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी की धार्मिक पवित्रता और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए बृहत्तर लुंबिनी क्षेत्र के समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया गया है।
अब लुंबिनी में होने वाले विकास कार्य केवल पर्यटन और आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विरासत संरक्षण, पर्यावरण, स्थानीय आजीविका और धार्मिक महत्व को साथ लेकर आगे बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए बड़े निर्माण कार्य शुरू करने से पहले विस्तृत योजना और आवश्यक अध्ययन को अनिवार्य आधार बनाने पर जोर दिया गया है।
नेपाल सरकार, यूनेस्को, लुम्बिनी विकास कोष और विश्व बैंक के सहयोग से 18 से 20 सितंबर तक आयोजित बृहत्तर लुंबिनी क्षेत्र संबंधी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें स्थानीय समुदाय, विहार-गुम्बा प्रतिनिधि, पर्यटन एवं आतिथ्य व्यवसायी, विशेषज्ञ, नीति निर्माता और विकास साझेदार शामिल रहे। तीन दिन तक चले मंथन के बाद बृहत्तर लुंबिनी के संरक्षण और दीर्घकालीन विकास के लिए प्राथमिकताएं तय की गईं।
सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि लुंबिनी का विकास सामान्य पर्यटन क्षेत्र की तरह नहीं किया जा सकता। पवित्र उद्यान का शांत बौद्ध वातावरण, धार्मिक आस्था, स्थानीय परंपरा और सांस्कृतिक परिदृश्य विकास योजना का आधार होंगे।
गुरुयोजना, भू-उपयोग और संरक्षण योजना के साथ जलवैज्ञानिक अध्ययन, जल निकासी तथा पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के बाद ही आधारभूत संरचना विकसित करने की सिफारिश की गई।
बृहत्तर लुंबिनी की योजना को केवल मायादेवी मंदिर और पवित्र उद्यान तक सीमित नहीं रखा गया है। तिलौराकोट-कपिलवस्तु, देवदह और रामग्राम जैसे ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों को भी संरक्षण और विकास की व्यापक योजना से जोड़ा गया है। सम्मेलन के प्रतिभागियों ने इन स्थलों का स्थलगत अवलोकन कर संरक्षण की स्थिति, तीर्थ यात्रियों की जरूरतों और स्थानीय समुदाय की चुनौतियों को समझा।
सम्मेलन में स्थानीय समुदाय को विकास का लाभार्थी भर नहीं, बल्कि साझेदार बनाने पर विशेष जोर दिया गया। नगरपालिकाओं, लुंबिनी विकास कोष, विहार-गुम्बा समुदाय और स्थानीय सरोकारवालों के बीच समन्वय मजबूत करने की सिफारिश की गई।
मायादेवी मंदिर, प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण व पुनर्स्थापना में उनके ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई। आगंतुकों को लुंबिनी की स्थानीय परंपरा और धार्मिक महत्व की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री खड्गराज पौडेल ‘गणेश’ ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक पवित्रता कायम रखते हुए विकास को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। लुंबिनी को केवल विरासत स्थल के बजाय जीवंत और पवित्र सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
