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यहां रक्षाबंधन के अगले दिन क्यों मनाया जाता है त्योहार? महोबा में 844 साल पुरानी परंपरा, वजह थी राजकुमारी

Published: Fri, 28 Aug 2026 03:38 PM (IST)Updated: Fri, 28 Aug 2026 07:13 PM (IST)

महोबा में रक्षाबंधन का त्योहार 844 साल पुरानी एक ऐतिहासिक परंपरा के कारण अगले दिन मनाया जाता है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से सुदृढ़ किया गया है। बैकग्राउंड में ऐतिहासिक कीरतसागर सरोवर है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से सुदृढ़ किया गया है। बैकग्राउंड में ऐतिहासिक कीरतसागर सरोवर है।

HighLights

  1. महोबा में रक्षाबंधन अगले दिन मनाने की 844 साल पुरानी परंपरा।

  2. राजकुमारी चंद्रावल ने पृथ्वीराज चौहान से युद्ध कर विजय प्राप्त की।

  3. कजली महोत्सव 29 अगस्त से कीरतसागर तट पर शुरू होगा।

जागरण संवाददाता, महोबा। जिले में रक्षाबंधन को लेकर सालों से चली आ रही परंपरा का लोग आज भी निर्वहन करते चले आ रहे हैं।

बात 844 साल पहले की है, शहर के कीरतसागर तट पर हुए भुजरियों के युद्ध में राजकुमारी चंद्रावल ने सखियों के साथ हाथों में तलवार लेकर आल्हा ऊदल की गैर मौजूदगी में ठीक रक्षाबंधन के दिन दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान से लोहा लिया था।

युद्ध में विजय प्राप्त हुई और राखी के दूसरे दिन कजलियों (अंकुरित गेहूं) का विसर्जन हो सका। यही कारण है कि समूचे बुंदेलखंड में रक्षाबंधन का त्योहार दूसरे दिन मनाया जाता है। यह परंपरा आज भी चली जा रही है।

राजकुमारी चंद्रावल ने दिखाया जौहर

आल्हा गायक वंशगोपाल यादव व इतिहासकार डाॅ. एलसी अनुरागी बताते हैं कि आल्हा ऊदल की गैर मौजूदगी में राजकुमारी चंद्रावल ने जौहर दिखा पृथ्वीराज चौहान की सेना का डटकर मुकाबला किया। निष्कासित किए गए आल्हा ऊदल को भनक लगी तो वह भी साधु वेश में यहां आए और चौहान सेना का डटकर मुकाबला किया। भीषण युद्ध में राजकुमार अभई मारा गया।

अंत में चंदेल सेनाओं ने चौहान सेना को धूल चटाकर घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। तभी से यहां विजयोत्सव का जश्न मनाया जाता है और 29 अगस्त से कीरतसागर तट पर 15 दिनों तक चलने वाले कजली महोत्सव की शुरूआत होगी।

यहां महोबा संरक्षण एवं विकास समिति द्वारा सांस्कृतिक मंच व आल्हा परिषद द्वारा आल्हा मंच में बुंदेली संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इतिहासकार डाॅ. एलसी अनुरागी व आल्हा गायक वंशगोपाल ने बताया कि युद्ध के चलते बुंदेलखंड में रक्षाबंधन दूसरे दिन मनाने की परंपरा है।

सांस्कृतिक मंच में ये होंगे कार्यक्रम

महोबा संरक्षण एवं विकास समिति के तत्वावधान में सांस्कृतिक मंच में कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाएगा।

  • 29 अगस्त को पहले दिन शाम छह बजे से मां चंद्रिका वंदना, आल्हा गायन, स्वागत गीत, कछियाई, बुंदेली लोक गायन, सावन गीत व ईसुरी की चौकड़ी आदि कार्यक्रम होंगे।
  • 30 अगस्त को आल्हा गायन के साथ ही सूफी गजल गायन, नृत्य, साइंस शो, आज के सुदामा कार्यक्रम होगा।
  • 31 अगस्त को बुंदेली कजरी गीत, बुंदेली नाट्य एवं नृत्य, वनटांगिया व राजस्थानी नृत्य
  • 1 सितंबर को आल्हा व भजन गायन
  • 2 सितंबर को सोहर गीत, दिवारी एवं पाई डंडा नृत्य आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
  • वहीं, तीन सितंबर को कत्थक नृत्य नाटिका, आल्हा गायन, भाेजपुरी भजन संध्या
  • अंतिम दिन 4 सितंबर को राजा हरिश्चंद्र नाट्य, इंडियन आइडल नाइट दिव्यांशी मौर्य व वृंदावन का महारास आदि कार्यक्रम आयोजित होंगे।