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महोबा में अंतिम यात्रा की झकझोर देने वाली तस्वीर, श्मशान घाट नहीं मिला तो तिरपाल हाथ में पकड़ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार

Published: Mon, 24 Aug 2026 06:52 PM (IST)

महोबा के बीहट मजरे में श्मशान घाट न होने के कारण बारिश में तिरपाल के नीचे एक बुजुर्ग का अंतिम ...और पढ़ें

चिता को अग्नि देने के लिए तिरपाल तानकर खड़े ग्रामीण। वीडियो ग्रैब

चिता को अग्नि देने के लिए तिरपाल तानकर खड़े ग्रामीण। वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. महोबा के बीहट में श्मशान घाट न होने से अंतिम संस्कार में बाधा

  2. बारिश के बीच तिरपाल के नीचे बुजुर्ग का अंतिम संस्कार हुआ

  3. यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी को दर्शाती है

संवाद सूत्र, पनवाड़ी(महोबा)। महोबा से अंतिम यात्रा की एक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर ने सरकारी व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी। जब 250 आबादी के लोगों के लिए श्मशान नहीं बना तो तिरपाल को हाथों से तानकर बारिश में बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया गया। बता दें 17 अगस्त को भी दलदल रास्ते से होकर निकली अंतिम यात्रा ने भी सिस्टम की लापरवाही को उजागर किया था।

डिजिटल युग में भी ग्रामीण क्षेत्रों के मजरे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रचलित हुआ। यह वीडियो रविवार का ब्लाक पनवाड़ी की ग्राम पंचायत के करीब 250 आबादी वाले मजरे बीहट का बताया जा रहा है। जिसमें बदहाली की तस्वीर नजर आ रही है। यहां के निवासी 82 वर्षीय दृगभान यादव की छत से गिरने से मौत हो गई थी। रविवार को अंतिम संस्कार के लिए स्वजन व ग्रामीण शव लेकर निकले, तभी बारिश शुरू हो गई।

श्मशान घाट व पक्की छत न होने के कारण ग्रामीणों को तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। ग्रामीण राजेश व हरगोविंद ने बताया कि यहां न तो पक्की सड़कें हैं, न बारात घर और न ही श्मशान घाट। आमतौर पर ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए करीब तीन किमी. दूर धसान नदी के किनारे जाते हैं। मानवेंद्र सिंह यादव और धान सिंह यादव ने बताया कि बारिश के दिनों में परेशानी होती है। बेटियों की शादी-ब्याह के दौरान भी परिवारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

उधर प्रशासक प्रधान अरुण कुमार ने बताया कि अभी तक श्मशान घाट के लिए जगह निर्धारित नहीं हुई थी। ग्रामीण नदी किनारे दाह संस्कार करते हैं। वहीं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी आमिर खान ने बताया कि भूमि निर्धारित कर ली गई है। निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। बजट आते ही शमशान घाट का कार्य शुरू कराया जाएगा।

 

घुटनों तक भरे पानी से गुजरी बुजुर्ग की अर्थी का वायरल हुआ था वीडियो

मौदहा विकासखंड के खंडेह गांव में जल निकासी और पक्के रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को एक बुजुर्ग की अर्थी घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ से निकालकर श्मशान घाट ले जानी पड़ी। बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर करता इस घटना का वीडियो इंटरनेट 17 अगस्त को जमकर प्रचलित हो रहा है।